-२०१६ में २५० बोरवेल के नाम पर करोड़ों खर्च – आज ज्यादातर का अता-पता नहीं
अनिल मिश्रा / उल्हासनगर
उल्हासनगर में पानी का संकट गहराते ही मनपा प्रशासन के पुराने इंतजामों की पोल खुलने लगी है। शहर के हर इलाके से पानी की किल्लत की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि २०१६ में भीषण जलसंकट के दौरान करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए करीब २५० बोरवेल आखिर कहां गायब हो गए? दस साल बाद शहर फिर उसी बदहाली की दहलीज पर खड़ा है।
उस समय जनता के दबाव में ७५ वार्डों में करीब २५० बोरवेल खुदवाए गए थे। कई जगह हैंडपंप और पानी की टंकियां भी लगाई गई थीं। लेकिन आज सामाजिक संस्था का दावा है कि इनमें से अधिकांश व्यवस्था जमीन पर मौजूद ही नहीं है। तलाश करने पर वार्ड नंबर ४ स्थित श्मशानभूमि के सामने पेड़ से लिपटा एक बोरवेल और उस पर लगा हैंडपंप मिला। शहर के कुएं भी बदहाली का शिकार हैं।
मनपा का दावा, ३०३ बोरवेल चालू!
दूसरी ओर जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता अशोक धुले ने इन आरोपों को गलत बताते हुए आंकड़े पेश किए। उनके मुताबिक शहर में कुल ४४९ बोरवेल हैं। उल्हासनगर-४ और ५ में २०५ में से १२७, जबकि उल्हासनगर-१, २ और ३ में २४४ में से १७६ बोरवेल चालू हैं। कुल ७४ बोरवेल बंद हैं। शहर में पांच कुएं हैं और १२५ अवैध पानी कनेक्शन काटे गए हैं। सवाल यह कि यदि सैकड़ों बोरवेल चालू हैं, तो शहर की प्यास क्यों नहीं बुझ रही। क्या बोरवेल केवल सरकारी आंकड़ों में जिंदा हैं? मनपा को अब कागजी दावों से आगे बढ़कर हर बोरवेल का वार्डवार सत्यापन और सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करनी चाहिए।
