-अनिल तिवारी
भई, देश की राजनीति में आजकल गजब का गरबा चल रहा है हों! सरकार चलाने वाले ही लोकतंत्र बचाने के लिए सड़क पर उतर रहे हैं! पहली बार गलती से सही काम कर रहे हैं, बाप्पा! मान रहे हैं कि इस सरकार के खिलाफ तो आंदोलन बनता है, हां!
नागपुर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भाजपा के अभियान में हिस्सा लिया और कांग्रेस पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। मोटा भाई से लेकर छोटा भाई सब सड़क पर हैं, शायद मोदी सरकार से लोकतंत्र बचाने के लिए, ना। अरे भाई, आ शूं थई गयू छे तमने? कोण तो बताड़ो, होले से रे कान में। सरकार तमारा इच है। बारा बरस हो गया। महाराष्ट्र में भी महायुति ज है। फिर गृह मंत्री, सब मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री सड़क पर उतरकर लोकतंत्र बचाने की गुहार किस्से लगा रे है? गलत मैसेज जाता है न, बापू, आपडा मोदी जी के बारे में।
लोग बोलेंगे ना, वाह रे वाह! सत्ता पण तमारी, सरकार पण तमारी, अने लोकतंत्र बचावानी जवाबदारी कोनी!
भई, लोकतंत्र पर संकट बताने वाले भी सत्ता में, संकट लाने वाले भी सत्ता में और विपक्ष को संकट का जिम्मेदार ठहराने वाले भी सत्ता में! तो फिर संकट है किधर बापू? लोकतंत्र में या सत्ता पक्ष के राजनीतिक हिसाब-किताब में? या अपुन के फेवरेट ज्ञानेश बापू में? जबरदस्त सिक्सर मारा रे, एकीच झटके में सारे सड़क पे। सत्ता, विपक्ष, छोकराओ सब! भाजप बोले के, कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं की क्रेडिबिलिटी कमजोर कर रही है। विपक्ष चुनाव आयोग और मतदाता सूचियों की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। अरे भाई, सवाल पूछना अराजकता कब से हो गया? लोकतंत्र में जनता हिसाब मांगे तो उसे जवाब देना चाहिए या उसके खिलाफ पदयात्रा निकालनी चाहिए?
पन मजाच चे हां! विपक्ष सड़क पर उतरे तो अराजकता! सत्ता पक्ष सड़क पर उतरे तो लोकतंत्र की रक्षा! अरे भाई, आ तो गजब नो न्याय छे! सड़क ऐज, संविधान ऐज, जनता भी वही! बस झेंडे सत्ता के और सत्ता केच खिलाफ वातावरण बना रहे हैं!
बापू, लोकतंत्र कोई गरबा पंडाल नहीं है कि जिसकी सरकार, वही प्रवेश का पास बांटे और बाकी सब बाहर गेटकीपर का खोपड़ी चाटें! लोकतंत्र बचाने का सबसे अच्छा रास्ता बताऊं क्या तो तुम लोग क्या करो न, कि मतदाता सूची पर उठे सवालों का दस्तावेजी जवाब दे डालो। फरियाद गलत होवे तो साक्षी सामने रख डालो न बाप्पा। लफड़ाच खल्लास।
जनता भोली है गांडी नई!
नई तो भई, बारह साल से सत्ता में बैठकर भी लोकतंत्र बचाने के लिए सड़क पर उतरना पड़े तो जनता पूछेगी, इतने साल से संभाल शूं रह्या हता? बापू जनता भोली है गांडी नई! पूछेगीच… कि सरकार पण आपणी, सत्ता पण आपणी, अने लोकतंत्र बचावानी बूमाबूम पण आपणी! सा माटे?
