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महायुति में रार!

– जब सम्मान ही नहीं तो महायुति में रहने का फायदा क्या?
– शिंदे गुट ने की उप मुख्यमंत्री से भाजपा की शिकायत
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सब कुछ ठीक होने के दावों की एक बार फिर पोल खुल गई है। सत्ता बचाने के लिए बनाए गए महायुति में अब सहयोगी दलों के बीच ही अपमान, उपेक्षा और वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है। भाजपा पर शिंदे गुट के नेताओं को सरकारी कार्यक्रमों से लगातार दूर रखने का आरोप लगा है। नाराज नेताओं ने उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सामने अपनी शिकायत रखते हुए सवाल उठाया है कि जब महायुति में सम्मान और अधिकार ही नहीं मिल रहा, तो फिर साथ रहने का फायदा क्या है?
शिंदे गुट के सांसदों, विधायकों और नगरसेवकों ने आरोप लगाया है कि पिछले एक वर्ष से भाजपा सरकारी कार्यक्रमों में शिंदे गुट के नेताओं को जानबूझकर नजरअंदाज कर रही है। संविधान बचाओ पदयात्रा, नई मुंबई हवाई अड्डे पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के अनावरण, कोलाबा में आवासों की चाबियां बांटने के कार्यक्रम और वर्षा बंगले पर आयोजित सूखा राहत बैठक जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में शिंदे गुट नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया।
नाराजगी केवल कार्यक्रमों के निमंत्रण तक सीमित नहीं है। शिंदे गुट के नेताओं का आरोप है कि सरकारी अधिकारी भी उनकी बात सुनने के बजाय भाजपा नेताओं के निर्देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं। आखिर अधिकारियों को सहयोगी दल के जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने का अधिकार किसने दिया? यह सवाल भी उठाया गया है।
इस शिकायत पर एकनाथ शिंदे ने नेताओं को उचित समाधान निकालने का आश्वासन दिया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि सरकार में उप मुख्यमंत्री होने के बावजूद शिंदे अपने ही दल के नेताओं को सम्मान और अधिकार नहीं दिला पा रहे हैं। मनोज जरांगे पाटील की कथित ऑडियो क्लिप का विवाद और विधान परिषद चुनाव में भाजपा की हार के बाद दोनों दलों के बीच तल्खी पहले ही सामने आ चुकी है। अब सरकारी कार्यक्रमों में वर्चस्व की लड़ाई ने महायुति की अंदरूनी कलह को फिर उजागर कर दिया है। दरअसल, यह गठबंधन विकास और जनहित से ज्यादा सत्ता में हिस्सेदारी और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का अखाड़ा बनता दिखाई दे रहा है। जनता के सामने एकता का प्रदर्शन करने वाले नेताओं के बीच ही भरोसे का संकट गहरा रहा है।

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