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वेदपाठ के लिए टाटा की ८४ हेक्टेयर जमीन!.. सरकार की कवायद पर हाई कोर्ट ने लगाया ब्रेक

– २०१८ में फडणवीस ने रतन टाटा को लिखा था पत्र
– निजी फाउंडेशन के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई रद्द
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र सरकार द्वारा एक निजी संस्था के लिए टाटा पावर की ८४ हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की कार्रवाई को मुंबई हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा २०१८ में उद्योगपति रतन टाटा को लिखा गया पत्र भी न्यायिक चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। मामला पुणे जिले में ठोकरवाड़ी बांध जलाशय के आसपास स्थित टाटा पावर की जमीन का है। कंपनी यहां ७५ मेगावाट का भिवपुरी जलविद्युत केंद्र संचालित करती है और १,००० मेगावाट की पंप्ड स्टोरेज परियोजना प्रस्तावित है।
२५ जून २०१८ को तत्कालीन मुख्यमंत्री फडणवीस ने रतन टाटा को पत्र लिखकर जलाशय के दो भूखंडों को वैदिक मंत्रोच्चार के लिए उपयुक्त बताया था। इसके बाद टाटा पावर और महर्षि वेदोद्धारक फाउंडेशन के बीच बातचीत हुई, लेकिन कंपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हुई। मार्च २०२५ में महाराष्ट्र सरकार ने संबंधित जमीन को औद्योगिक क्षेत्र घोषित करते हुए अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की। फाउंडेशन यहां वेलनेस सेंटर और आयुर्वेदिक कॉलेज सहित बड़ी परियोजना स्थापित करना चाहता था।
टाटा पावर ने अदालत में दलील दी कि निजी संस्था को लाभ पहुंचाने के लिए औद्योगिक विकास संबंधी कानून का इस्तेमाल किया गया। इससे जलविद्युत परियोजना और पर्यावरण प्रभावित हो सकते हैं। सरकार तथा फाउंडेशन ने प्रस्तावित परियोजना से लगभग एक हजार स्थानीय रोजगार पैदा होने का तर्क दिया। न्यायमूर्ति मनीष पितले और न्यायमूर्ति श्रीराम शिरसाट की खंडपीठ ने पाया कि बांध की उच्चतम बाढ़ रेखा से ५०० मीटर के भीतर विकास प्रतिबंधित करने वाला सरकारी निर्णय लागू है। अदालत ने अधिग्रहण प्रक्रिया को अस्वीकार्य मानते हुए अधिसूचना रद्द कर दी। पैâसले ने महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है कि निजी संस्थाओं की परियोजनाओं के लिए सरकारी भूमि अधिग्रहण शक्तियों के इस्तेमाल की सीमा क्या होनी चाहिए।

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