मनमोहन सिंह
कमरे की खिड़की से बाहर केवल अंतहीन अंधेरा और कभी-कभार गूंजती गोलियों की आवाजें सुनाई देती थीं। यह कोई सामान्य जेल नहीं थी, बल्कि एक ऐसी हिरासत जगह थी, जहां युद्ध के नियमों का कोई अस्तित्व नहीं था। उस ठंडे फर्श पर लेटी एलीना (बदला हुआ नाम) के लिए हर बीतता मिनट एक सदी जैसा था। यूक्रेन के एक छोटे से कस्बे से पकड़े जाने के बाद, उसे इस सैन्य हिरासत केंद्र में लाया गया था। सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के लिए वह केवल एक वैâदी नहीं, बल्कि जंग का एक जरिया थी। पूछताछ के नाम पर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ा गया।
एक रात जब उसने जानकारी देने से इनकार कर दिया तो सुरक्षाकर्मियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। उसे न केवल शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि यौन हिंसा और बलात्कार को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया, ताकि उसकी आत्मा को कुचला जा सके। दूसरी तरफ हजारों मील दूर एक और हिरासत केंद्र में तारिक (बदला हुआ नाम) नामक एक फिलिस्तीनी युवक बंद था। उसकी कहानी भी अलग नहीं थी। संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं को इन केंद्रों तक पहुंचने की अनुमति नहीं थी, क्योंकि वहां छिपे सच बेहद खौफनाक थे। तारिक को कई दिनों तक बिना कपड़ों के एक ठंडे कमरे में रखा गया। सुरक्षा बलों के कुछ सदस्यों द्वारा उसे लगातार यौन उत्पीड़न और अपमान का सामना करना पड़ा। अधिकारियों के लिए यह सिर्फ एक वैâदी को वश में करने का तरीका था, लेकिन तारिक के लिए यह उसकी मानवीय गरिमा पर सबसे गहरा प्रहार था। वह अक्सर सोचता कि क्या दुनिया को कभी इन बंद दीवारों के पीछे चल रहे इस घिनौने सच का पता चलेगा?
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े
– यूक्रेन में कुल मामले: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार निगरानी मिशन ने संघर्ष से जुड़े ३१० गंभीर मामलों को सत्यापित किया है।
– क्रूरता के तरीके: इन मामलों में मुख्य रूप से बलात्कार, जननांग विकृति और वैâदियों को बिजली के झटके देने जैसी अमानवीय हरकतें शामिल हैं।
-दोषी संस्थाएं: इस घिनौने कृत्य के लिए इजरायल और रूस की सेना, सुरक्षा बलों और जेल सेवाओं के कुछ सदस्यों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है।
– यूएन का बड़ा एक्शन: जांच में सहयोग न करने और हिरासत केंद्रों तक पहुंच न देने के कारण संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों को अपनी ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। एलीना और तारिक आज भी उस सदमे से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र का यह एक्शन उनके जख्मों को पूरी तरह तो नहीं भर सकता, लेकिन इसने बंद कमरों में छिपे उस खौफनाक सच को दुनिया के सामने लाकर रख दिया है।
