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एआई बना ‘इमोशनल पार्टनर’…लोग छोड़ रहे परिवार और दोस्त!

– मानसिक सेहत और असली रिश्तों पर पड़ रहा बुरा असर

-आईआईएम लखनऊ की एक स्टडी ने किया चौंकानेवाला खुलासा

आज की डिजिटल दुनिया में एआई टूल्स लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। कामकाज से लेकर निजी भावनाओं तक, लोग अब हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए एआई का सहारा लेने लगे हैं। लेकिन यही सुविधा अब चिंता की वजह भी बन रही है। हाल ही में सामने आई आईआईएम लखनऊ की एक स्टडी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिसर्च के मुताबिक, एआई चैटबॉट्स और वर्चुअल कंपेनियन से बढ़ती भावनात्मक नजदीकियां लोगों की मानसिक सेहत और असली रिश्तों पर बुरा असर डाल रही हैं। कई लोग अब अकेलेपन और तनाव से बचने के लिए इंसानों के बजाय एआई से जुड़ रहे हैं, जिससे परिवार, दोस्त और सामाजिक रिश्ते कमजोर पड़ते जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जरूरत से ज्यादा एआई पर निर्भरता इंसान को भावनात्मक रूप से अलग-थलग और मानसिक रूप से कमजोर बना सकती है।
आईआईएम लखनऊ की एक स्टडी ने एक चौंकानेवाला खुलासा किया है। उनकी एक स्टडी की मुताबिक, एआई कंपेनियन से जरूरत से ज्यादा भावनात्मक जुड़ाव असली रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। रिसर्चर्स का कहना है कि एआई आने के बाद लोगों के बातचीत करने और भावनात्मक सहारा लेने का तरीका तेजी से बदल रहा है। कई कंपनियां एआई टूल्स को ‘इमोशनल सपोर्ट’ और ‘कंपैfिनयनशिप’ के रूप में पेश कर रही हैं, जिससे लोग धीरे-धीरे इंसानों के बजाय मशीनों पर भरोसा करने लगे हैं।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि कई लोग अकेलेपन से बचने और मानसिक तनाव कम करने के लिए एआई चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं। इससे वास्तविक जीवन में लोगों से संवाद कम हो रहा है और सामाजिक दूरी बढ़ने का खतरा पैदा हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लंबे समय तक ऐसा चलता रहा, तो यह मानसिक संतुलन और भावनात्मक व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
दिमाग को ‘शॉर्टकट मोड’ में डाल रहा एआई!
बता दें कि इससे पहले रिसर्च में भी चौंकाने वाला दावा किया गया था। रिसर्चर्स के अनुसार, एआई चैटबॉट्स का कुछ समय तक इस्तेमाल भी इंसान की सोचने और समस्या सुलझाने की क्षमता को कमजोर कर सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लगातार एआई पर निर्भर रहने से लोग कठिन परिस्थितियों में खुद फैसला लेने और संघर्ष करने से बचने लगते हैं। आसान जवाब पाने की आदत दिमाग को धीरे-धीरे मानसिक रूप से कमजोर बना सकती है। ऐसे में एआई का इस्तेमाल सुविधा के लिए करना ठीक है, लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भर होना भविष्य में गंभीर समस्या बन सकता है।

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