-कार्यकर्ताओं से केवल मतदान बढ़ाने पर जोर दे रहे
मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की पराजय के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी सपा मुखिया अखिलेश यादव ने नये सिरे से 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार कर रहे हैं। पिछले दिनों कांग्रेस नेताओं द्वारा बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती से मिलने जाने की खबर मीडिया में लीक होने के बाद मायावती का कांग्रेस नेताओं को लौटाने की घटना अखिलेश यादव को चौकन्ना कर दिया है। अखिलेश यादव के लोग यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि जब आप समाजवादी पार्टी के गठबंधन में हैं तो आपको सपा मुखिया से मिलना था। न कि बहुजन समाज पार्टी की मुखिया से, यह घटना सपाइयों में मन में खटकने लगी है कि बिहार और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की वास्तविक भूमिका क्या थी? अब अखिलेश यादव चाहते हैं कि साथ मिल कर लड़ने के बाद जिस तरह लोकसभा चुनाव में शानदार सफलता मिली थी उसी प्रयोग को आगे बढ़ाते हुये 2027 के विधानसभा चुनाव में यूपी से भाजपा को उखाड़ दिया जाये। 2027 के चुनाव तक समाजवादी पार्टी किसी तरह की कोई गलती नहीं करना चाहती है। चाहे प्रत्याशी चयन का मामला हो या अन्य दलों के साथ गठबंधन का। टिकट के लिये उन्होंने स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय कार्यकर्ताओं को चिन्हित करना आरंभ कर दिया है।
अखिलेश यादव बार-बार यही कहते हैं कि समाजवादी पार्टी टिकट बंटवारे में वह इस बार किसी तरह की कोई गलती नहीं करना चाहती है। हमारे लिये यह चुनाव करो या मरो का विषय बन गया है।इसके लिए फार्मूला तय हो गया है। निजी एजेंसी से प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कराया जा रहा है। सपा इस बार रिपोर्ट कार्ड के साथ ही जिला स्तरीय नेताओं के फीडबैक के आधार पर टिकट फाइनल करेगा। टिकट के लिए खुद का जनाधार और क्षेत्र में अच्छी छवि को ही प्राथमिकता दी जाएगी। 403 विधानसभा सीटों का जो रिपोर्ट कार्ड तैयार करा रहा है, उसके आधार पर फीडबैक लेने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। अखिलेश यादव इन दिनों जिलेवार नेताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। इसमें रिपोर्ट कार्ड के आधार पर स्थानीय नेताओं से फीडबैक लिया जा रहा है। इसमें सीट पर पार्टी की स्थिति, टिकट दिए जाने वाले उम्मीदवारों के बारे में जानकारी और पार्टी की कमजोरी और मजबूती के कारणों को पूछा जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट और स्थानीय नेताओं के फीडबैक के आधार पर टिकट को अंतिम रूप दिया जाएगा। भले ही मजबूत दावेदारी हो, पर फीडबैक खराब हुआ तो टिकट नहीं मिलेगा।
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की धरती पर भाजपा का विजय रथ रोकने वाली सपा पिछले विधानसभा चुनाव तरह इस बार कोई भी चूक नहीं चाहती है। इसीलिए फीडबैक और एजेंसी के सर्वे रिपोर्ट का आपस में मिलान कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन दोनों के मिलान में जिसकी दावेदारी मतदाताओं की नजर में मजबूत मिलेगी, उसे ही टिकट दिया जाएगा। जिन सीटों पर इस तरह का काम पूरा हो चुका है, उन सीटों पर उम्मीदवारों को धीरे-धीरे क्षेत्र में तैयारी के लिए हरी झंडी दी जा रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिन्हें भी हरी झंडी दी जा रही है, उनको सख्त हिदायत दी जा रही है कि कोई भी ऐसा काम न करें, जिससे उनकी और पार्टी की स्थिति खराब हो। अखिलेश यादव के रणनीतिकारों का मानना है कि वर्ष 2022 का चुनाव वह अच्छा लड़ी, लेकिन जरा सी चूक से सत्ता बनाने से रह गई। लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम से वह उत्साहित है। कार्यकर्ताओं को अंदरखाने में संदेश दिया जा रहा है कि वे बस मत प्रतिशत बढ़ाने में जुटें। सपा को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 111 सीटें और 32.06% मत मिले और लोकसभा चुनाव 2024 में सपा 37 सीटें जीती और 33.59% मत मिले। भाजपा को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 41.29% मत पाकर 255 सीटें जीती थी। इसीलिए कार्यकर्ताओं को सिर्फ और सिर्फ वोट बचाने और मत प्रतिशत बढ़ाने में जुटने का संदेश दिया जा रहा है।
