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जन्मदिन विशेष : तम्मा तम्मा से एक दो तीन तक…माधुरी के पांच अमर गीत

हिमांशु राज

माधुरी दीक्षित का नृत्य, अभिनय और स्टेज पर वक्त के साथ पनपी चमक भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमिट स्थान रखती है। उनके कई गीत न सिर्फ उस दौर के हिट रहे बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बने। सबसे पहले याद आता है “एक दो तीन” (तेजाब)-ऐसा गीत जिसने माधुरी को नृत्य की देवी करार दिया और जिसे देखा बिना किसी के कदम थम जाते हैं। इसके बाद के वर्षों में जब यह गीत नए कलाकारों ने गीतात्मक रूप से पेश किया तब भी मूल प्रस्तुति की धार और भाव जगजाहिर रहे।
“तम्मा तम्मा” (थानेदार) ने नब्बे के दशक का जोश और ऊर्जा जनता के दिलों में बिठा दी। यह गीत क्लबों और समारोहों का स्थायी हिस्सा बन गया। नए स्वरूपों में इसे फिर से सुनना सामान्य है, पर माधुरी के स्टेप और हाव‑भाव का अलग ही असर रहा। “चोली के पीछे” (खलनायक) ने बोल्ड अभिव्यक्ति और नाटकीयता के साथ चर्चा की सीमाओं को भी छुआ; विवादों के बीच भी यह गीत अपनी सांस्कृतिक छाप छोड़ता आया है और समय‑समय पर नए सन्दर्भों में जीवित होकर उभरता रहा।
“धक धक करने लगा” (बेटा) ने माधुरी को वह लोकप्रिय उपाधि दी जो आज भी लोगों के ज़ुबान पर रहती है। इसकी मधुर रेखा और सहज कामुकता ने स्टेज‑परफॉर्मेंस में एक मानक स्थापित किया, जिसे कई प्रस्तुति‑शैलियों में अपनाया गया। अंत में “मेरा पिया घर आया” (याराना) जैसे ऊर्जावान गीतों ने मंचों और समारोहों में कई बार नया जीवन पाया; इनके ताल‑तलावर और झुमते सुर आज भी दर्शकों को खींचते हैं।
इन गीतों के अनेक रीप्रोडक्शन, रिमिक्स और मंचीय प्रस्तुतियां यह दर्शाती हैं कि माधुरी के गीत केवल हिट नहीं रहे, वे सांस्कृतिक धरोहर बन गए। उनके भाव, कदम और वक्त की पकड़ ने हर नए संस्करण को सम्मानित किया और मूल गीतों की आत्मा बची रही।15 मई को जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनायें देते हुए कहा जा सकता है कि माधुरी दीक्षित सिनेमा की अविरल रानी और नृत्य की अनवरत प्रेरणा हैं.

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