हमें रोना तो आया था
मगर हम रो नहीं पाए
जिए ऐसे जुल्म सह कर
किसी से कह नहीं पाए
छुपाए हरेक आंसू आंखों में हमने
भरे सिसकी गले लगकर,
किसी के हो नहीं पाए
वो रातें थीं मोहब्बत की
वो बातें थीं मोहब्बत की
गुनाह ऐसे किए दिल ने,
बस ये मुसीबत की,
हम तेरे हो नहीं पाए
तुम मेरे हो नहीं पाए
जमाने की शर्मिंदगी से बचाया था कभी हमने
गुजारे थे कभी वो पल, जताया था कभी हमने
याद है वो कॉल जब हंसकर किए बातें
याद है वो किस्से और शरारत की बातें।
-मनोज कुमार
गोण्डा, उत्तर प्रदेश
