कहां-कहां से आए बच्चे।
दिल्ली को गरमाए बच्चे।।
अपना पूरा दर्द समेटे।
उछले कूदे गाए बच्चे।।
मर्यादा के भीतर रहकर।
बढ़िया नाम कमाए बच्चे।।
अंधेरे से लड़ने वाला।
सारा नियम बनाए बच्चे।।
अनशन वाली सीढ़ी चढ़कर।
इन्कलाब को लाए बच्चे।।
अहंकार का किला ढहाकर।
हाहाकार मचाए बच्चे ।।
संवादों का द्वार खुल गया।
भीतर घुसकर आए बच्चे।।
पूरा भारत खुशी हो गया।
ऐसा दिन भी लाए बच्चे।।
दुनिया भर की धमकी सुनकर।
तनिक नहीं घबराए बच्चे।।
पूरा मौसम बदल दिए हैं।
परिवर्तन हैं लाए बच्चे।।
साहस में ही अकल डालकर।
दुनिया को दिखलाए बच्चे।।
समझदार तो इतने हैं कि।
पैलट गन भी खाए बच्चे।।
मार पड़ी फिर भी हंस हंसकर।
डफली खूब बजाए बच्चे।।
अपना पूरा यौवन देकर।
काफी जोर लगाए बच्चे।।
जो हैं हमें डराने वाले।
उनको खूब डराए ब्च्चे।।
हम भी खुश हैं वे भी खुश हैं।
खुशियों को ले आए बच्चे।।
कहां कहां से आए बच्चे।
दिल्ली को गरमाए बच्चे।।
-अन्वेषी
