घर से क्या संस्कार मिले?
गाली के उपहार मिले?
लड़कियों के मुंह से गाली?
कुछ ने ठोकी अच्छी ताली,
कलियां ही विद्रोह करें तो
क्या कर पाए घर का माली?
हंसी उडाते खार मिले
खुले-खुले से तन देखे
अभद्रता के मन देखे,
नाग नागिनों के मुंह से
जहर उगलते फन देखे।
भीड में सब बेजार मिले।
वर्दी ने पहले पत्थर खाए
तब जाकर डंडे बरसाए,
उनकी चिंता किसने पाली?
प्रश्न पूछते सबके साए।
जुडे बिदेसी तार मिले।
उनको चिंता बच्चों की है
भले बुरे सब अच्छों की है,
जनता सब कुछ देख रही है
किसकी टोली सच्चों की है
सबको अच्छा सार मिले।
किसने चाहे देश के टुकडे?
किसे सुनाते हो ये दुखड़े।
पहचाने तो सब जाएंगे
छुपे कहां पर हैँ ये मुखड़े?
बंद सभी के द्वार मिले।
सुनने में ही शर्म लगे
अच्छे इनके कर्म लगे?
देश के मुखिया को न छोड़ा
कहां किसी का धर्म लगे?
किसे कहां आधार मिले?
घर से…
-प्रदीप नवीन, इंदौर, मध्य प्रदेश
