सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई का देवनार डंपिंग ग्राउंड एक बार फिर मनपा की सुस्त कार्यशैली का शिकार बन गया है। १.८५ करोड़ मीट्रिक टन कचरे को हटाने और ११० हेक्टेयर जमीन को साफ करने की योजना की टेंडर प्रक्रिया चौथी बार भी टल गई है। अब इसकी आखिरी तारीख ४ जुलाई रखी गई है।
बता दें कि करीब २,३६८ करोड़ रुपए की लागत वाली इस योजना में बायोरिमेडिएशन तकनीक से तीन साल में डंपिंग साइट को साफ करना था। लेकिन टेंडर को पहले ३ जून, फिर २३ जून और उसके बाद १ जुलाई तक बढ़ाया गया। अब चौथी बार यह तारीख बदली गई है। सवाल यह है कि हर बार समय क्यों बढ़ाया जा रहा है? क्या मनपा खुद तैयार नहीं है या ठेकेदारों की हर मांग मानना उसकी मजबूरी बन चुकी है? जिन कंपनियों ने टेंडर में दिलचस्पी दिखाई, उन्होंने मूल्यवृद्धि के प्रावधान और दस्तावेजों के लिए समय मांगा और प्रशासन ने तुरंत सिर झुका लिया।
क्या मुंबई की जनता को हर बार कागजी वादों के सहारे ही रखा जाएगा? डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाली बदबू, जहरीली गैसें और हवा में पैâला खतरनाक प्रदूषण अब बीमारियां बनकर लोगों की सांसों में घुल चुका है। लेकिन मनपा अब भी योजना को वास्तविक क्रियान्वयन की बजाय बार-बार की तारीखों में उलझा रही है। ऐसे में यह कचरा कब हटाया जाएगा और जब देवनार जैसी जमीन पर पुनर्विकास की योजना है तो फिर इस सफाई में इतनी देर क्यों हो रही है? ऐसा सवाल मुंबईकरों द्वारा उठाया जा रहा है।
