सामना संवाददाता / मुंबई
भारत की समृद्ध परंपरा और अद्भुत प्रतिभा का गौरवशाली उदाहरण इंदौर के डॉ. चेतना एवं एडवोकेट तनुज दीक्षित की तीन वर्षीय सुपुत्री धनिष्का ने प्रस्तुत किया है।
आज अपने जन्मदिन पर धनिष्का दीक्षित तीन वर्ष की आयु पूर्ण करने के साथ में दो मिनट से भी कम समय में ग्यारह से अधिक वैदिक मंत्रों का शुद्ध उच्चारण कर पूरी दुनिया को चकित कर दिया हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए बेहद गर्व का विषय है।
इस असाधारण प्रतिभा को मान्यता देते हुए वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन ने धनिष्का का नाम विश्व रिकॉर्ड हेतु आधिकारिक रूप से शामिल किया है। इस अवसर पर संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री संतोष शुक्ला ने कहा कि “धनिष्का की उपलब्धि भारत की सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ नन्हे बच्चों की असीम क्षमताओं का भी प्रतीक है।”
उन्होंने यह भी बताया कि शीघ्र ही एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें धनिष्का को औपचारिक रूप से सम्मानित किया जाएगा।
यह उल्लेखनीय है कि पूर्व में धनिष्का के दादा विजय दीक्षित भी वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स यूके में अपना नाम दर्ज करवा चुके हैं। इस प्रकार यह उपलब्धि परिवार की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाती है।
