मुख्यपृष्ठग्लैमरअदायगी में संवाद की अभिव्यक्ति सादगी से भी हो सकती है-पदम सिंह

अदायगी में संवाद की अभिव्यक्ति सादगी से भी हो सकती है-पदम सिंह

हिमांशु राज

पदम सिंह, हिंदी और भोजपुरी सिनेमा के एक अनुभवी अभिनेता, इन दिनों अपने नए प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में हैं। सामना के लिए हिमांशु राज से उन्होंने खुलकर बात की। बातचीत की शुरुआत होती है उनके आत्मविश्वास भरे मुस्कान के साथ। वह कहते हैं, “मेरे आने वाले कुछ प्रोजेक्ट्स में ‘लाज’, ‘मंथन’, ‘भायमकाल’ और ‘एक्स गर्लफ्रेंड’ शामिल हैं। ये सभी वेब सीरीज हैं, और हर कहानी का अपना अलग स्वभाव व संदेश है।” उनके चेहरे पर सादगी झलकती है, मानो वे सिर्फ अभिनय नहीं, हर किरदार को जीते हैं। जब उनसे आज के वेब कंटेंट पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने पल भर के लिए गंभीर होकर कहा, “अभिव्यक्ति जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बिना गाली-गलौज के कुछ कहा ही न जा सके। संवाद का असर शब्दों से नहीं, भाव से होता है। गुस्से या तनाव को दिखाने के और भी तरीके हैं-एक नजर, एक ठहराव, एक सन्नाटा बहुत कुछ कह देता है।” उनके शब्दों में अभिनय की गहराई और जीवन का अनुभव साफ झलकता है।पदम सिंह इस बात पर विशेष जोर देते हैं कि दर्शक अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सार्थक कथानक चाहते हैं। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, “लोग अब वह देखना चाहते हैं जो दिल और समाज दोनों को छू जाए। हमारे ये नए प्रोजेक्ट्स उसी दिशा में कदम हैं।”फिल्मों की बात छिड़ी तो उन्होंने अपनी आगामी फीचर फिल्म ‘डॉटर ऑफ इंडिया’ का जिक्र किया। भावुक स्वर में उन्होंने बताया, “यह फिल्म महिलाओं के सम्मान और उनके साहस की कहानी है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का प्रयास है।”बातचीत के अंत में उन्होंने बड़ी सहजता से कहा, “मेरा मकसद है कि दर्शक मेरे काम को सच्चाई और भावना से महसूस करें। अभिनय मेरे लिए सिर्फ कला नहीं, साधना है।” पदम सिंह के शब्दों से यह स्पष्ट था कि वे अपने हर किरदार में जीवन का एक अंश छोड़ आते हैं-चाहे वह फिल्मों का पर्दा हो या वेब सीरीज की स्क्रीन।

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मन पाखी