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संपादकीय : ट्रंप का टैरिफ बम …मोदी मजबूर क्यों?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की कथित मित्रता का वस्त्रहरण ट्रंप हर दिन कर रहे हैं। कोई भी दिन ऐसा नहीं जाता, जिस दिन ट्रंप इस मित्रता की एक परत न उघाड़ते हों। बुधवार को भी यही सिलसिला जारी रहा। ट्रंप ने १ अगस्त से हिंदुस्थान से आयातित वस्तुओं पर २५ फीसदी टैरिफ लगाने का एलान करते हुए मोदी की मित्रता की और एक परत उघाड़ डाली। ट्रंप यहीं नहीं रुके। उन्होंने भारत पर ‘जुर्माना’ लगाकर रूस से हथियार और कच्चा तेल खरीदने पर भी अपना गुस्सा जाहिर किया। एक तरफ भारत पर २५ प्रतिशत टैरिफ लगानेवाले ट्रंप ने पाकिस्तान की शरीफ सरकार के साथ व्यापार समझौता किया, उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे पाकिस्तान के तेल भंडारों की खोज कर उनका विकास करेंगे। वहीं दूसरी ओर उन्होंने मोदी के जख्मों पर नमक छिड़कते हुए कहा, ‘भविष्य में किसी दिन पाकिस्तान भी भारत को तेल बेचेगा।’ गुरुवार को उन्होंने इस जख्म को और दाग दिया। उन्होंने रूस के साथ भारत की अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को ‘डूबती’ और ‘मृत’ अर्थव्यवस्था बताया। उन्होंने यह भी श्राप दे डाला कि ये दोनों देश अपनी
मृत अर्थव्यवस्थाओं को
और डुबो सकते हैं। ट्रंप का २५ फीसदी टैरिफ बम, पाकिस्तानियों के साथ उनका समझौता और उसके बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की संभावना, ये सभी बातें एक देश के रूप में भारत को बेहद क्रोधित करनेवाली हैं और देश के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाली हैं। इसलिए उम्मीद थी कि मोदी सरकार इस पर तुरंत स्पष्ट और कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करेगी, लेकिन मोदी से लेकर शाह-जयशंकर तक, सबकी जुबां खामोश हैं। वे ट्रंप द्वारा दिए गए एक और ‘झटके’ से उबर नहीं पाए हैं। लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा का जवाब देते हुए भी मोदी ट्रंप का सीधे तौर पर नाम लेने की हिम्मत नहीं दिखा पाए और ट्रंप के टैरिफ बम को लेकर न तो वे अपने हाथों की घडी खोल पाए और न ही अपने मुंह पर लगा ताला खोल पाए। कहने को तो मोदी सरकार ने विदेश मंत्रालय के ‘सूत्रों’ के हवाले से एक छोटा सा खुलासा किया है। ‘ट्रंप की घोषणा का गंभीरता से अध्ययन किया जा रहा है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस संबंध में किसी के दबाव में नहीं झुकेगा’, बताया गया कि भारत ने ऐसा
साफ तौर पर कहा
है। अरे, झुकेंगे नहीं न, ऐसा ही कहना है तो ऐसा बेधड़क कहिए। विदेश मंत्रालय के ‘सूत्रों’ की आड़ में क्यों छिप रहे हो? प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री अपने मुंह खोलने को तैयार क्यों नहीं हैं? एक तरफ तो कहते हो कि ट्रंप के टैरिफ बम पर नहीं झुकेंगे और दूसरी तरफ ‘भारत अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर पूरी तरह सकारात्मक है’ का राग भी आलापते हो। सिर झुकाकर ‘माइलॉर्ड’ ट्रंप की तरफ देखते हैं कि शायद वो खुश हो जाएं। ट्रंप साहब मोदी सरकार की इस ‘ताकत’ से अच्छी तरह वाकिफ हैं। इसीलिए मित्रता का जिक्र करके वो रोज इस मोदी-मित्रता की एक-एक परत उघाड़ रहे हैं। मोदी को उनकी मित्रता की जगह दिखा रहे हैं। टैरिफ लादकर लठिया रहे हैं। मोदी के पास इसे चुपचाप बर्दाश्त करने के अलावा और चारा भी क्या है? मित्र के तौर पर मोदी ने ट्रंप से गले लगकर अपनी शान जमाई है, लेकिन उनका यह मित्र भारत का ही गला काट रहा है और ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ कहनेवाले मोदी मजबूर होकर चुप्पी साधे हैं। न तो सीधे ट्रंप का नाम ले रहे हैं और न ही उनके टैरिफ बम को नाकाम करने का साहस दिखा रहे हैं। मोदी उनके सामने इतने मजबूर क्यों हैं? देश की जनता इस सवाल का जवाब चाहती है।

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