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ठाणे की योजना में झोल!..फर्जी लाभार्थियों के डाले गए नाम…आरटीआई में हुआ खुलासा

सामना संवाददाता / मुंबई

सरकार ने झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को उचित घर मुहैया कराने के लिए `झोपू’ (झुग्गी पुनर्वास) योजना शुरू की थी। इस योजना को लेकर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। ठाणे की इस `झोपू’ योजना में घोटाला हुआ है और फर्जी लाभार्थियों के नाम सूची में डाले गए हैं। यह घोटाला ठाणे महानगरपालिका के अधिकारियों और डेवलपर्स की मिलीभगत से किया गया है और मनपा के सामाजिक विकास विभाग की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आई है।
खोपट स्थित गोकुलदास वाडी, मैरी डिसोजावाड़ी चॉल झुग्गी-झोपड़ियों का स्वामित्व नंदीश्वर को.ऑप. हाउसिंग सोसायटी के पास है और इनका पुनर्वास `झोपू’ योजना के तहत वर्ष २००५ से चल रहा है। हालांकि, सूचना के अधिकार के अनुसार इस योजना में पात्र-अपात्र सूची में बड़ी गलती की गई है। इस झुग्गी परियोजना में वास्तव में २४ मूल झुग्गी-झोपड़ी मालिक थे, लेकिन करीब ११ फर्जी नाम डालकर उन्हें लाभार्थी दिखाया गया। सामाजिक कार्यकर्ता संदीप महागावकर ने आरटीआई के तहत इस मामले का खुलासा किया है।
मुख्यमंत्री से की गई अपील
ठाणे शहर में कई झोपड़पट्टी परियोजनाओं में भूमाफिया और बिल्डरों ने तोड़फोड़ की है। एसआरए प्राधिकरण और मनपा को कई बार शिकायत करने के बावजूद फर्जी झोपड़पट्टी मालिकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अंत में महागावकर ने बताया कि खोपट स्थित झोपड़पट्टी परियोजना के संबंध में सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की गई है।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
एसआरए प्रशासन ने सूचना के अधिकार के तहत दिए गए अपने जवाब में स्पष्ट किया कि झोपड़पट्टी मालिकों की पात्रता निर्धारित करने के लिए न केवल किराए की रसीद को सबूत माना जाता है, बल्कि इमारतों और आवास के अन्य सबूतों की भी जांच की जा रही है। हालांकि, किराए की रसीदों को देखने पर कई फर्जी झोपड़पट्टी मालिक पात्र पाए गए हैं। स्थानीय लोगों ने बार-बार इस घोटाले की शिकायत की। उसके बाद अपीलीय अधिकारी और अतिरिक्त जिला कलेक्टर की अदालत ने नवंबर २०२३ में फर्जी झोपड़पट्टी मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। हालांकि, महागावकर ने खेद व्यक्त किया कि कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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