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गया के डुमरिया डिग्री कॉलेज में पहली बार शिक्षक दिवस पर भव्य और गरिमामय समारोह आयोजित

अनिल मिश्र / पटना

बिहार प्रदेश सरकार द्वारा हाल के दिनों में पूरे प्रदेश भर में दो सौ ग्यारह डिग्री कॉलेज विभिन्न प्रखंडों के सुदूरवर्ती इलाकों में खोले गए हैं।इसी कड़ी में बिहार प्रदेश के सबसे चर्चित और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में से एक गया जिले के डुमरिया में भी गया जिला मुख्यालय से लगभग एक सौ किलोमीटर की दूरी पर भी एक डिग्री कॉलेज खोले गए हैं।इसी सिलसिले में आज राजकीय डिग्री महाविद्यालय, डुमरिया में 5 सितंबर 2026 को भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद्, विद्वान एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के पावन अवसर पर शिक्षक दिवस समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। यह महाविद्यालय के इतिहास में प्रथम शिक्षक दिवस समारोह था।इस
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. संजय कुमार द्वारा डॉ. राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ हुआ। अपने संबोधन में प्राचार्य ने डॉ. राधाकृष्णन के शिक्षा एवं दर्शन के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र, संस्कार, नैतिक मूल्यों एवं भविष्य का निर्माता होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षकों के प्रति सम्मान, अनुशासन तथा निरंतर अध्ययन के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।तत्पश्चात महाविद्यालय के शिक्षकों ने डॉ. राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। डॉ. गीत, रिया रश्मि, पल्लवी जोशी, सुमन कुमारी, सुमित कुमार हलधर, अजय कुमार महतो, अनिकेत रंजन, राज कुमार चौधरी, बिश्व रंजन सहित अन्य वक्ताओं ने शिक्षक की महत्ता एवं सामाजिक दायित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।इस बीच इन सभी वक्ताओं ने कहा कि शिक्षण मात्र एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक महान एवं उत्तरदायित्वपूर्ण सेवा है। शिक्षक विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता को विकसित करने के साथ उनमें मानवीय संवेदना, नैतिक चेतना एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का संचार करता है।कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों के बीच मिठाई वितरण के साथ हुआ। समारोह ने शिक्षा, शिक्षक- सम्मान एवं सामाजिक निर्माण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया। यह प्रथम शिक्षक दिवस समारोह महाविद्यालय के लिए सम्मान, कृतज्ञता और गौरव का एक अविस्मरणीय अवसर बन गया।

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