-अमेरिका ने ईरान में मचाई तबाही, तेल टैंकर पर किया हमला
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच शनिवार को खार्ग द्वीप के पास एक ईरानी तेल टैंकर को अमेरिकी मिसाइलों से निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, टैंकर पर चार अमेरिकी मिसाइलें गिरीं। घटना में फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और टैंकर के चालक दल को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। खार्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है। यह क्षेत्र लंबे समय से अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के केंद्र में रहा है। हालांकि, शनिवार के हमले को लेकर अभी तक अमेरिकी पक्ष की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
टैंकर पर चार मिसाइलें गिरने का दावा
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, खार्ग द्वीप के पास एंकर क्षेत्र में मौजूद एक तेल टैंकर पर चार अमेरिकी मिसाइलें दागी गर्इं। स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया गया कि हमले के बाद चालक दल को जहाज से बाहर निकाला जा रहा है और अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इससे पहले क्षेत्र में धमाकों की आवाजें भी सुनी गई थीं। ईरानी मीडिया की शुरुआती रिपोर्टों में धमाकों के स्रोत को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
होर्मुज को लेकर भी बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भी वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से जुड़े समुद्री यातायात पर नाकेबंदी लागू की है और पहले भी खार्ग की ओर जा रहे टैंकरों को रोकने के लिए कार्रवाई की है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, जुलाई में एक खाली तेल टैंकर को चेतावनियों का पालन नहीं करने पर मिसाइल से निष्क्रिय किया गया था। शनिवार की घटना ऐसे समय हुई है, जब दोनों देशों के बीच कई महीनों से सैन्य टकराव जारी है। खार्ग के आसपास किसी नए हमले की पुष्टि होने पर इससे क्षेत्र में तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ सकती हैं।
खर्ग द्वीप क्यों है इतना अहम?
फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग द्वीप ईरान के प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनलों में शामिल है। ऐतिहासिक रूप से ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का करीब ९० प्रतिशत हिस्सा इस क्षेत्र से होकर गुजरता रहा है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का सीधा असर ईरान के तेल उद्योग और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
