सामना संवाददाता / मुंबई
राकांपा सुप्रीमो शरद पवार ने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचत और सरकारी खर्च कम करने की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए पवार ने कहा कि हालात गंभीर दिखाई दे रहे हैं और इसे केवल दिखावे तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के हालिया संदेश से साफ संकेत मिलते हैं कि देश आर्थिक दबाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते हुए कहा कि देशहित के मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लिया जाना चाहिए। इस बैठक में खुद प्रधानमंत्री को भी मौजूद रहना चाहिए।
दिखावा नहीं, लगातार अमल जरूरी
पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद कोई मंत्री गाड़ियों का काफिला घटा रहा है तो कोई पैदल चलने का प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन यह केवल दिखावा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन गाड़ियां कम करने या पैदल चलने से कुछ नहीं बदलेगा। असली सवाल यह है कि मोदी सरकार और उनके मंत्री इस पैâसले को कितने दिनों तक लगातार लागू रखते हैं। शरद पवार ने सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर ईंधन बचत इतनी जरूरी थी तो चुनावी दौर में यह चिंता क्यों नहीं दिखाई दी? उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष को अब अचानक खर्च कम करने और पेट्रोल-डीजल बचाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है? सरकार को यह फैसला लेने में इतना समय क्यों लगा?
स्थिति गंभीर है
शरद पवार ने कहा कि देश पहले भी कठिन आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर चुका है और ऐसे समय में प्रशासनिक खर्चों में कटौती के कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को सलाह दी कि केवल प्रतीकात्मक कदमों से काम नहीं चलेगा, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक अनुशासन और पारदर्शी नीति की जरूरत है।
सीएम हो, भाषा में संयम बरतो
राहुल गांधी को लेकर मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों पर नाराजगी जताते हुए पवार ने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और यह एक संवैधानिक पद है। ऐसे में सीएम पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा उनके बारे में अपमानजनक या असंयमित भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। फडणवीस को नसीहत देते हुए पवार ने स्पष्ट कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को गरिमा बनाए रखना आवश्यक है तथा सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का पालन होना चाहिए।
