सामना संवाददाता / मुंबई
देश के सात प्रमुख शहरों में घरों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। २०२५ की दूसरी तिमाही में देशभर में करीब ९६,२८५ आवासीय इकाइयां बिकीं, जबकि २०२४ की समान अवधि में यह आंकड़ा १.२० लाख से अधिक था। यह लगभग २० प्रतिशत की गिरावट है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन इस गिरावट से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां २५ प्रतिशत तक घटकर बिक्री ३१,२७५ यूनिट्स रह गई। बीते वर्ष की इसी अवधि में यहां ४१,५४० मकान बिके थे।
विशेषज्ञ इसके पीछे दो बड़ी वजहें बताते हैं एक, बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें और दूसरी, वैश्विक तनाव, जिससे संभावित खरीददार रुको और देखो की मुद्रा में चले गए, लेकिन इस पूरे परिदृश्य में प्रशासन की निष्क्रियता और नीति-निर्माण की ढिलाई भी बराबर की दोषी है।
जब घरों के दाम बेतहाशा बढ़ रहे थे, तब सरकार को मूल्य नियंत्रण और मध्यम वर्ग के लिए रियायतों की नीतियां लानी चाहिए थीं। होम लोन पर टैक्स छूट या सब्सिडी जैसी योजनाएं समय रहते लागू की जातीं तो बाजार में विश्वास बना रहता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इस तिमाही में कोलकाता, पुणे और एमएमआर में गिरावट देखी गई, जबकि चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद और बंगलुरु में मामूली बढ़ोतरी हुई। बिक्री घटने के साथ ही नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में भी १६ फीसदी की गिरावट देखी गई। २०२४ की तुलना में इस साल दूसरी तिमाही में लगभग १८,५०० यूनिट्स कम लॉन्च हुए।
