मुख्यपृष्ठनए समाचारमनुष्य मूलतः सात्विक, मांसाहार तर्कसंगत नहीं-डॉ. यशमंत सिंह

मनुष्य मूलतः सात्विक, मांसाहार तर्कसंगत नहीं-डॉ. यशमंत सिंह

 -बाबू धनंजय सिंह स्मृति व्याख्यानमाला

सामना संवाददाता / सुल्तानपुर

मनुष्य मूलतः शाकाहारी था। आदिमानव को मांसाहारी बताना तर्क संगत नहीं है। तथ्य बताते हैं कि सृष्टि में शाकाहार पहले आया है, मांस हमने हमेशा शौक के लिए खाया जरूरत के लिए नहीं। ये बातें राणाप्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित बाबू धनंजय सिंह स्मृति व्याख्यानमाला में संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ यशमंत सिंह ने कहीं।
महाविद्यालय के विवेकानंद सभागार में बाबू धनंजय सिंह स्मृति व्याख्यानमाला के अंतर्गत आयोजित ‘शाकाहार और मानव जीवन’ विषयक संगोष्ठी को वे बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि मांसाहार शरीर में बीमारी तो बढ़ाता ही है हमारा विचार भी दूषित करता है। शास्त्रों ने कहा है कि हम कम हिंसा द्वारा जीवन यापन करें। आत्मोन्नति तभी संभव है जब हम अपना जीवन न्यूनतम हिंसा से जियें। पशु पक्षी हमेशा से हमारे साथ इसीलिए रहते आये हैं क्योंकि हम उनका संरक्षण करते थे। जब हम उन्हें अपना आहार बनायेंगे तो पर्यावरण असंतुलित होगा ।
प्राचार्य प्रोफेसर दिनेश कुमार त्रिपाठी ने संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए कहा कि धरती पर चार करोड़ प्रजाति के पौधे हैं सभी में औषधीय गुण हैं। भोजन केवल शरीर ही नहीं मन को भी बनाता है इसलिए शाकाहार आवश्यक है। संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ प्रभात श्रीवास्तव व आभार ज्ञापन संयोजक डॉ आलोक कुमार पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर मुख्य कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेन्द्र प्रताप सिंह व परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर धीरेन्द्र कुमार सहित समस्त शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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