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हैप्पीनेस में हारा हिंदुस्थान! … फिर भी मेरा देश महान …विश्व रैंकिंग में पाकिस्तान से भी १४ पायदान नीचे रहा `मोदी का भारत’

सामना संवाददाता / नई दिल्ली 
केंद्र की मोदी सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है। और लोगों को सुखी-समृद्ध बताने की कोशिश कर रही है, लेकिन हकीकत तो यह है कि हिंदुस्थान में खुशियां हमारे पड़ोसी देश पकिस्तान से भी कम है। हिंदुस्थान हैप्पीनेस के मामले में पकिस्तान से भी हार गया है। लेकिन फिर भी हमारा देश महान है। विश्व हैप्पीनेस रैंकिंग की रिपोर्ट में मोदी का भारत १२६वें पायदान पर है, जबकि आतंकी देश के नाम से मशहूर हमारा पड़ोसी देश पकिस्तान १०८वें स्थान पर है। खुशियों के मामले में भारत पकिस्तान से भी १४ पायदान नीचे चला गया है। संयुक्त राष्ट्र प्रायोजित वार्षिक वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। बता दें कि पिछले १० वर्षों में भारत में मोदी सरकार की नीतियों के चलते लोगों को अनगिनत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस सरकार ने नोटबंदी, जीएसटी जैसे कई पैâसले लोगों पर जबरन थोपे हैं, जिससे लोगों को लम्बे समय तक बिना वजह परेशानी झेलनी पड़ी है। इसके आलावा महंगाई ने कई गुना तेजी से सर उठाया है तो बीमारी और बेरोजगारी ने भी लोगों को त्रस्त किया है। हैप्पीनेस के मामले में हमारे पड़ोसी देश चीन ६०वें, नेपाल ९३वें, पाकिस्तान १०८वें, म्यांमार ११८वें, श्रीलंका १२८वें, बांग्लादेश १२९वें और अफगानिस्तान १४३वें स्थान पर है।
रिपोर्ट के अनुसार, फिनलैंड लगातार सातवें साल दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना हुआ है। अमेरिका २० सबसे खुशहाल देशों की लिस्ट से बाहर हो गया है। `२०२४ वर्ल्ड हैप्पीनेस’ रिपोर्ट में १४३ देशों को शामिल किया गया है। इसमें अमेरिका १२ साल के इतिहास में पहली बार टॉप २० से बाहर हुआ है। वह २३वें स्थान पर खिसक गया है, जबकि २०२० में तालिबान के नियंत्रण में आने के बाद से मानवीय तबाही से त्रस्त अफगानिस्तान सबसे निचले पायदान पर है। हैप्पीनेस रैंकिंग लोगों के जीवन संतुष्टि के स्व-मूल्यांकन के साथ-साथ प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद, सामाजिक समर्थन, स्वस्थ जीवन, स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार पर आधारित है। उम्र के हिसाब से अधिक बारीकी से देखने पर, लिथुआनिया ३० से कम उम्र के लोगों की सूची में शीर्ष पर है, जबकि डेनमार्क ६० और उससे अधिक उम्र वालों के लिए दुनिया का सबसे खुशहाल देश है। रिपोर्ट  के अनुसार, सबसे खुशहाल देशों में अब दुनिया का कोई भी सबसे बड़ा देश शामिल नहीं है। टॉप १० देशों में केवल नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया की आबादी १५ मिलियन से अधिक है। साल २००६-१० के बाद से हैप्पीनेस इंडेक्स में सबसे तेज गिरावट अफगानिस्तान, लेबनान और जॉर्डन में देखी गई, जबकि पूर्वी यूरोपीय देशों सर्बिया, बुल्गारिया और लातविया में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।

प्रदूषण में भी हम `खरदूषण’  
हिंदुस्थान में प्रदूषण रोकने में भी केंद्र की मोदी सरकार नाकाम रही है। यह सरकार अपनी नीतियों और योजनाओं में भारी कमी के चलते `खरदूषण’ साबित हुई। खरदूषण का है जिसमें तमाम बुराइया और तृतीया हों। केंद्र की भाजपा सरकार की नीतियों के चलते भारत टॉप दस प्रदूषित देशों की सूची में तीसरे क्रमांक पर है। बांग्लादेश और पकिस्तान के बाद भारत में सबसे अधिक प्रदूषण है। यहां की वायु गुणवत्ता सबसे घटिया बताई गई है। इतना ही नहीं टॉप १० दूषित शहरों में नौ भारत के शहर शामिल हैं। २०२३ में भारत की वायु गुनवत्ता पीएम २.५ सांद्रता के साथ ५४.४ माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो डब्ल्यूएचओ के मानक से १० गुना अधिक है। छठवीं वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट में दिल्ली को एक बार फिर दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बताया गया है। दिल्ली को चौथी बार यह दर्जा मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, शहरों में बिहार का बेगूसराय दुनिया में सबसे अधिक प्रदूषित है। दूसरे स्थान पर गुवाहाटी है और तीसरे स्थान पर दिल्ली है। भारत को तीसरा सबसे प्रदूषित देश बताया गया है। प्रदूषित देशों की लिस्ट में पहले पायदान पर बांग्लादेश और दूसरे पर पाकिस्तान है।

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