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क्या बिहार में बिखर रहा है एनडीए का कुनबा? … मोदी के दौरे से नीतिश ने काटी कन्नी! … चिराग भी हैं खफा-खफा

सामना संवाददाता / पटना
बिहार में भाजपा ने जोड़-तोड़ की राजनीति करते हुए जैसे-तैसे सत्ता तो हासिल कर ली है लेकिन वो जिनके सहारे सत्ता में आई है अब उन्हीं लोगों के चलते उसकी मुसीबत भी बढ़ गई है। कमोबेश यही हाल महाराष्ट्र में भी है। दरअसल, लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और बिहार-महाराष्ट्र में भाजपा के सहयोगी दल सीटों के बंटवारे पर भाजपा की मानने से साफ इंकार कर रहे हैं। दोनों जगह पर भाजपा बड़े भाई की भूमिका में है। फिर भी उसकी कोई नहीं सुन रहा है। इसीलिए सीटों के बंटवारे के मामले में भाजपा की उलझन बढ़ गई है। इसी के साथ ही एनडीए का सियासी कुनबा गड़बड़ा रहा है। ऐसे में मिशन-३७० भाजपा के लिए टेंशन बनता जा रहा है? भाजपा के लिए यह टेंशन वाली बात इसलिए भी है क्योंकि कल पीएम मोदी के बिहार दौरे में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार नदारद रहे, जिसने कई सवाल पैदा कर दिए हैं। चिराग पासवान तो पहले से ही खफा-खफा से हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि राजनीतिक गलियारे में एनडीए का मिशन ३७० गड़बड़ा गया है।
भाजपा अपने ही सहयोगी दलों को मना नहीं पा रही है। गौरतलब है कि बिहार में भाजपा ने जेडीयू, जीतनराम मांझी की पार्टी एचएएम, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी और एलजेपी के दोनों धड़े (चिराग-पशुपति) से गठबंधन कर रखा है। लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर शह-मात का खेल जारी है।
बिहार में सीट बंटवारे पर फंसा पेच
बिहार में भाजपा ने २०१९ में जेडीयू और एलजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। सूबे की ४० लोकसभा सीटों में से भाजपा और जेडीयू ने १७-१७ सीट पर तो लोजपा ६ सीटों पर चुनाव लड़ी थी। भाजपा १७, जेडीयू ने १६ और लोजपा ने छह सीटें जीती थीं। पिछले साल जेडीयू के एनडीए से अलग होकर महागठबंधन का हिस्सा बन जाने के बाद भाजपा ने जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाले दल को साथ लिया। इसके अलावा दो गुटों में बंट चुकी एलजेपी में एक की अगुवाई चिराग पासवान कर रहे हैं तो दूसरे का नेतृत्व उनके चाचा पशुपति पारस कर रहे हैं। जेडीयू की एनडीए में अब वापसी हो चुकी है। ऐसे में अब सीटों की खींचतान शुरू है, जो भाजपा को ही सिमटने के लिए मजबूर कर रही है।

एनडीए यानी नेगेटिव डिटेक्टिव एलायंस!
लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार बुधवार को बिहार के दौरे पर बेतिया पहुंचे थे। प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार शामिल नहीं हुए। पीएम के कार्यक्रम में नीतिश कुमार के शामिल नहीं होने पर अब राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि २ दिन पहले औरंगाबाद और बेगूसराय में प्रधानमंत्री की सभा हुई तो एनडीए के दो घटक दलों के नेता चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा पीएम की सभा में शामिल नहीं हुए। आज नीतिश कुमार भी प्रधानमंत्री की सभा में नहीं पहुंचे। इससे साफ लगता है कि एनडीए नेगेटिव डिटेक्टिव एलायंस हो गया है। आरजेडी प्रवक्ता ने आगे कहा कि एनडीए के नेताओं का हाथ और गला तो जरूर मिल रहा है, लेकिन दिल नहीं मिल रहा है।

 

 

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