-विधान परिषद चुनाव में महायुति में भितरघात
-भाजपा खेमा भी शिंदे गुट के खिलाफ
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के बीच नासिक स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र में महायुति के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। वहां शिंदे गुट और भाजपा के बीच खुलकर ताल ठोकी जा रही है। सूत्र बताते हैं कि हालत यह है कि भाजपा नेता अपने अंदरखाने में साफ कह रहे हैं कि यहां विपक्ष जीत जाए तो चलेगा पर किसी भी हालात में शिंदे गुट का उम्मीदवार नहीं जीतना चाहिए।
गौरतलब है कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के एक वर्ग में शिंदे गुट के अधिकृत उम्मीदवार को समर्थन देने को लेकर भारी नाराजगी है और कुछ स्थानीय नेता किसी भी कीमत पर शिंदे गुट की राजनीतिक बढ़त रोकने के पक्ष में हैं। सूत्रों के अनुसार, नासिक सीट शिंदे गुट के खाते में जाने के बाद भाजपा के कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हुआ। इसी असंतोष के चलते बागी उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से चुनावी मुकाबला और जटिल हो गया है।
ताकत झोंकने के मूड में नहीं
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा के कुछ स्थानीय नेता शिंदे गुट के उम्मीदवार के पक्ष में पूरी ताकत झोंकने के मूड में नहीं हैं। भाजपा के नाराज खेमे की सोच यह है कि यदि चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार को लाभ होता है तो भी वह स्वीकार्य है, लेकिन शिंदे गुट को यह सीट नहीं जानी चाहिए।
सामंत को भेजा नासिक
भाजपा और शिंदे गुट की भिड़ंत की पृष्ठभूमि में मंत्री उदय सामंत को नासिक भेजा गया है। उनका मुख्य उद्देश्य बागी नेताओं को मनाना और महायुति के घटक दलों के बीच समन्वय स्थापित करना बताया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर असंतोष कितना गहरा है और उसे कितना नियंत्रित किया जा सकेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
नासिक में है महायुति के शक्ति संतुलन की परीक्षा!
नासिक विधान परिषद सीट का चुनाव रोचक हो गया है। भाजपा महायुति के अपने सहयोगी शिंदे गुट को हराना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल एक विधान परिषद सीट का नहीं, बल्कि महायुति के भीतर शक्ति संतुलन की परीक्षा भी बन गया है। यदि भाजपा का असंतुष्ट वर्ग खुलकर सक्रिय रहता है तो इसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है और विपक्ष को अप्रत्याशित लाभ मिल सकता है।
-शिंदे गुट में मची हलचल…आधी रात में चली हाईवोल्टेज बैठक!
-सत्तार समेत कई विधायकों का भाजपा के प्रति फूटा गुस्सा
महायुति सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा। विधान परिषद चुनाव के बीच शिंदे गुट में दबा असंतोष अब खुलकर बाहर आने लगा है। भाजपा के बढ़ते दबदबे, सीटों के बंटवारे और विकास निधि में कथित भेदभाव को लेकर शिंदे गुट के कई विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। यही वजह रही कि मंगलवार रात ठाणे स्थित शिंदे के सरकारी बंगले पर देर रात तक बंद कमरे में हाईवोल्टेज बैठक चली।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में सबसे ज्यादा आक्रामक तेवर अब्दुल सत्तार के रहे। उन्होंने खुलकर आरोप लगाया कि भाजपा की ताकत बढ़ने के बाद शिंदे गुट के नेताओं को लगातार ‘दबाया’ जा रहा है। सत्तार ने शिकायत की कि उनके विधानसभा क्षेत्र को विकास निधि में जानबूझकर नजरअंदाज किया गया और स्थानीय स्तर पर उन्हें राजनीतिक तौर पर कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। दरअसल, पूरा विवाद जालना-छत्रपति संभाजीनगर स्थानीय स्वराज संस्था विधान परिषद सीट से शुरू हुआ। यह सीट पहले शिंदे गुट के पास मानी जा रही थी, लेकिन स्थानीय निकायों में भाजपा के बढ़े हुए संख्याबल के आधार पर यह सीट भाजपा के खाते में चली गई। इसी पैâसले से नाराज होकर अब्दुल सत्तार ने बगावती रुख अपनाया और अपने बेटे का नामांकन दाखिल करवा दिया। इस कदम ने महायुति के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को खुलकर सामने ला दिया।
विधायकों और सांसद को बुलाया
महायुति में संभावित दरार को रोकने के लिए शिंदे ने तुरंत मराठवाड़ा क्षेत्र के छह विधायकों और सांसद संदीपान भुमरे को ठाणे बुलाया। बैठक में कई विधायकों ने भाजपा की ‘संगठनात्मक ताकत’ और स्थानीय स्तर पर बढ़ती दखलंदाजी को लेकर नाराजगी जाहिर की।
कई बार झुकना पड़ा
बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि नगरपालिका, नगर पंचायत, महापालिका और जिला परिषद चुनावों में शिंदे गुट को कई बार भाजपा के आगे झुकना पड़ा। इससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन में राजनीतिक पहचान कमजोर पड़ रही है।
