अल्फाज

चलो कुछ अल्फाज लिखते हैं,
तुम्हारे नाम एक ताज लिखते हैं।

तुम्हारे गालों में लिपटी हया पर,
सुनहरी यादों के साज लिखते हैं।
चलो कुछ अल्फाज लिखते हैं।

बिखरते हैं कैसे पत्ते शाख से,
उनका दर्द-ए-आगाज लिखते हैं।
चलो कुछ अल्फाज लिखते हैं।

छेड़ता है कैसे बादल चांद को,
उसका बयान-ए-अंदाज लिखते हैं।
चलो कुछ अल्फाज लिखते हैं।

झुकती आंखों की हया, हमीं पर
गिराती है कैसे कहर-ए-राज, लिखते हैं।
चलो कुछ अल्फाज लिखते हैं।

वंदना मौर्या, इंदौर

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