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निकाय चुनाव में हार के डर से बौखलाई महायुति …सत्ता की थैली से ‘अपनों’ को दे दी सौगात!

-एक दिन में नगर विकास विभाग ने जारी किए २० शासनादेश
-११५.५३ करोड़ की कर दी बंदरबांट
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र में मनपा और निकाय चुनावों की आहट के साथ ही महायुति सरकार की बौखलाहट खुलकर सामने आ गई है। इसका मुख्य कारण कई मंत्रियों का विवाद में आना बताया जा रहा है। इस वजह से जनता के डगमगाते भरोसे को देख सत्ता में बैठे नेताओं ने ‘सरकारी खजाना’ खोल दिया है। ये नेता सत्ता की थैली से अपने गढ़ बन चुके खास जिलों में मौजूद निकायों को करोड़ों की सौगात दे दी। सिर्फ एक दिन में नगर विकास विभाग ने २० शासनादेश जारी कर ११५.५३ करोड़ रुपए का बंदरबांट कर डाला, जिसमें सबसे मोटा हिस्सा नगर विकास विभाग के मुखिया उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के जिले ठाणे को मिला है। महायुति सरकार ने इस फंडिंग को ‘विकास’ का नाम दिया है, लेकिन शासनादेश बता रहे हैं कि यह बंटवारा विकास की जरूरतों के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक नजदीकियों और वोट बैंक साधने के इरादे से किया गया है।

ठाणे जिले को
सबसे ज्यादा फंड
३२.५० करोड़ रुपए की ‘विशेष कृपा’

मुंबई उपनगर, ठाणे, अंबरनाथ, नांदेड, जालना जैसे जिलों को खुले हाथों से करोड़ों दिए गए हैं, वहीं अन्य जिलों को या तो नाममात्र की रकम दी गई या पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ महीनों से महायुति सरकार की ग्रह दशा सही नहीं चल रही है। पिछले कुछ हफ्तों से महायुति सरकार के तीन मंत्री विवादों में फंसे हैं। सरकार को इससे शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है।
सबसे पहले शिंदे गुट के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट का विवाद सामने आया। उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने छत्रपति संभाजी नगर में एक होटल की नीलामी ‘मैनेज’ की। होटल विवाद के बीच संजय शिरशाट के सामने आए वीडियो में वे अपने बेडरूम में बैठे नजर आए। उनके पास एक बैग रखा था, जिसमें वैâश भरा था। इसके बाद दादा गुट के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे का विवाद सामने आया। उनका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह विधान परिषद में अपने फोन पर ऑनलाइन कार्ड गेम रमी खेलते हुए नजर आए। मॉनसून सत्र में राज्य मंत्री योगेश कदम के परिवार पर मुंबई में अवैध रूप से एक डांस बार चलाने का आरोप लगा है। इन सभी मंत्रियों की वजह से महायुति सरकार का भरोसा जनता में से उठते चला जा रहा है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस पर जमकर नाराजगी भी जता चुके हैं। देवेंद्र फडणवीस को टेंशन है कि अजीत पवार और एकनाथ शिंदे की यह अनदेखी सरकार को न भुगतनी पड़े।
दूसरी तरफ राज्य में निकाय चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, महायुति सरकार की बेचैनी बढ़ती जा रही है। दादा और शिंदे गुट के मंत्रियों की वजह से संभावित हार का डर महायुति को सताने लगा है। इस खतरे से घबराकर नगर विकास विभाग ने एक ही दिन में २० शासनादेश जारी कर ११५.५३ करोड़ रुपए की राशि ‘अपनों’ पर लुटा दी। यह पैसा जनता की बुनियादी जरूरतों के नाम पर मंजूर तो किया गया, लेकिन हकीकत में यह एक राजनीतिक सौदा प्रतीत होता है।
ठाणे महानगर पालिका को पांच करोड़ की सीधी मंजूरी दी गई। इसी तरह अंबरनाथ नगर परिषद को कुल २७.१३ करोड़ रुपए की भारी-भरकम सौगात मिली, जो कि राज्य के किसी भी नगर परिषद से अधिक है। इस तरह कुल ३२.५० करोड़ रुपए की ‘विशेष कृपा’ सीधे उप मुख्यमंत्री के जिले पर हुई है। इसके उलट दादा के पुणे की कई नगर परिषदों का फंड घटा दिया गया है। इसमें सासवड नपा के लिए मंजूर ८.५ करोड़ को घटाकर ६.९ करोड़ रुपए कर दिया गया। जेजुरी नपा के फंड को भी ५.६ करोड़ से घटाकर ४.८ करोड़ रुपए, यवतमाल के मारेगांव नपा और अकोला के हिवरखेड नपा के लिए मंजूर क्रमश: २-२ करोड़ के फंड को शून्य कर दिया हया है।
‘चहेतों’ की लिस्ट में मुंबई और नांदेड
मुंबई उपनगर के लिए जारी चार शासनादेशों में कुल १८ करोड़ और नांदेड-वाघाला मनपा को एक झटके में २० करोड़ रुपए की भारी मंजूरी दी गई। नासिक के लिए १० करोड़, अमरावती के लिए १२ करोड़ और त्र्यंबकेश्वर जैसे नगर परिषदों को भी करोड़ों दिए गए, जबकि मराठवाड़ा और विदर्भ के अन्य पिछड़े जिलों को या तो न के बराबर राशि मिली या पूरी तरह नकारा गया है।

इन जिलों में भी दिए गए नाम मात्र फंड
मूलभूत सुविधाओं के विकास को लेकर विशेष प्रावधान योजना के तहत निधि मंजूर की गई है। इनमें धाराशिव जिले के कलांब नपा को नाम मात्र एक करोड़ रुपए, बुलढाणा, परभणी, अकोला के लिए १० करोड़ रुपए फंड दिया गया है।

 

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