महिला शतरंज विश्व कप के फाइनल मुकाबले में हमवतन कोनेरू हम्पी को हराकर खिताब अपने नाम करनेवाली दिव्या देशमुख न केवल फिडे महिला शतरंज विश्व कप जीतनेवाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं, बल्कि भारत लौटने के बाद उन्होंने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि ‘मुझे नहीं लगा कि मैं मुश्किल में थी। मुझे लगता है कि उन्होंने (हम्पी) जो आखिरी गलती की, उसी ने मुझे जीत दिलाई।’ प्रतियोगिता में छुपे रुस्तम की तरह प्रवेश करनेवाली दिव्या ने कहा, ‘मैं सिर्फ अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रही थी। मैं किसी और चीज के बारे में नहीं सोच रही थी।’ अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार के साथ ही अपने कोच को देनेवाली दिव्या ने कहा, ‘मेरे पास युवा पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि उनके माता-पिता के लिए संदेश है कि उन्हें अपने बच्चों का पूरे दिल से समर्थन करना चाहिए क्योंकि उन्हें सफलता के समय उतनी नहीं, अपनी असफलताओं के दौरान उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।’
