सूफी खान
ईरान की जमीन से उठता धुआं और आसमान में जाती मिसाइलें ये नजारा था रूसी एस-४०० एयर डिफेंस सिस्टम का, जिसे अब ईरान ने पूरी तरह ऑपरेशनल कर दिया है। ये पहली दफा है जब ईरान ने इस सिस्टम का इस्फहान के पास लाइव टेस्ट किया। इस इलाके में ईरान के कई रणनीतिक परमाणु प्रतिष्ठान हैं। ईरान अब इन्हें दुनिया की सबसे एडवांस एयर डिफेंस तकनीक एस-४०० से सुरक्षित कर रहा है। २२ जून २०२५ के बाद ये ईरान के लिए बेहद जरूरी भी था क्योंकि इसी दिन अमेरिका ने ईरान के इस्फाहन, नतांज और फार्दो न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया था।
एस-४०० सिस्टम ४०० किलोमीटर तक दुश्मन के विमान, क्रूज मिसाइल और यहां तक कि स्टेल्थ फाइटर जेट को भी पहचान कर तबाह कर सकता है। माना जा रहा है कि अब इजरायली एफ-३५ जैसे लड़ाकू विमानों की क्षमता भी इस रक्षा कवच के आगे कमजोर पड़ सकती है। ये वही विमान हैं, जो हाल के महीनों में ईरानी ठिकानों को निशाना बना चुके हैं।
जानकार कहते हैं कि रूस से एसयू-३५ फाइटर जेट की डिलीवरी में देरी के बावजूद एस-४०० की तैनाती ईरान के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। इससे ईरान की रूस पर सैन्य निर्भरता और गहरी होती दिख रही है। वहीं, अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। डिफेंस एक्सपर्ट कह रहे हैं कि ये कदम न सिर्फ ईरान की रक्षा नीति को बदल रहा है, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की सामरिक स्थिति को हिला सकता है। ईरान की बढ़ती ताकत ने उसके दुश्मनों की नींद उड़ा दी है। जिस तरह से ईरान अपनी ताकत बढ़ा रहा है उससे ये कहना भी गलत नहीं होगा कि ईरान एक बार फिर कुछ बड़ा करने की सोच रहा है। कहा जा रहा है कि एस-४०० का टेस्ट एक परीक्षण से कहीं ज्यादा एक पैगाम है इजरायल और अमेरिका को कि ईरान अब हवा से आने वाले खतरे रोकने को तैयार है। कहा जा रहा है कि यह एक साफ संदेश है कि अगर हमला हुआ, तो जवाब पहले से कहीं ज्यादा तेज और सटीक होगा। अब सवाल है कि क्या ये तैनाती भविष्य में टकराव टाल पाएगी या एक नया संघर्ष जन्म लेगा।
ईरान अब इन्हें दुनिया की सबसे एडवांस एयर डिफेंस तकनीक एस-४०० से सुरक्षित कर रहा है। २२ जून २०२५ के बाद ये ईरान के लिए बेहद जरूरी भी था क्योंकि इसी दिन अमेरिका ने ईरान के इस्फाहन, नतांज और फार्दो न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया था।
