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मुस्लिम वर्ल्ड : कैसे पकड़ में आया ‘कसाई’ अबू लुलु… सूडान में क्यों बना दहशत का पर्याय?

सूफी खान

सूडान के उत्तरी कोर्डोफान राज्य के प्रमुख शहर अल-ओबैद के बाहरी इलाके में हाल ही में एक अंतिम संस्कार के दौरान हुए ड्रोन हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम ४० लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए। हमला उस समय हुआ जब सैकड़ों लोग एक शोक सभा में इकट्ठा होकर किसी की मौत के बाद अंतिम संस्कार कर रहे थे। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब २:३० बजे अचानक आसमान से ड्रोन की आवाज आई। इसके तुरंत बाद तीन विस्फोट हुए, जिनमें से दो सीधे शोक टेंट पर गिरे। तीसरा ड्रोन पास के एक आवासीय इलाके में गिरा, जिससे कई मकान ढह गए। हमले के बाद रैपिड सपोर्ट फोर्सेस जिसे वहां आतंकी घोषित किया गया है, के ड्रोन को क्षेत्र से दूर जाते देखा गया। इस घटना का सीधा जिम्मेदार अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज यानी आरएसएफ को ठहराया गया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह युद्धग्रस्त सूडान में नागरिकों पर हुआ सबसे घातक हमला है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब आरएसएफ ने सूडान के लोगों पर ड्रोन हमले किए हों। पिछले १८ माह से अल-फाशर शहर को घेरे हुए आरएसएफ के लोग हजारों लोगों को मौत के घाट उतार चुके हैं।
हाल ही में सूडान की फौज एसएएफ ने आरएसएफ के एक खूंखार दहशतगर्द को गिरफ्तार किया और उसकी तस्वीरें भी जारी की हैं। ये खुद को आरएसएफ का सैन्य कमांडर कहता है। आरएसएफ सदस्यों को कथित तौर पर सूडान के पश्चिमी दारफुर इलाके से पकड़ा गया है। इसमें अबू लुलु भी है।
लंबे बालों और दाढ़ी वाले चेहरे के साथ अबू लुलु सोशल मीडिया पर कई वीडियो में दिखाई दिया है। कभी-कभी वह निहत्थे लोगों को मारते हुए भी मुस्कुराता है, तो कभी जोर-जोर से हंसता है। अबू लुलु, जिसे ब्रिगेडियर जनरल अल-फतेह अब्दुल्ला इदरीस के नाम से भी जाना जाता है, अप्रैल २०२३ में सूडान में आरएसएफ और एसएएफ के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से क्रूरता और दहशत का प्रतीक बन गया था। तस्वीर में गिरफ्तारी के बाद उसे हथकड़ी के साथ दिखाया गया है। मीडिया रिपोर्ट बता रही है कि उसने ३१ लोगों को बेरहमी से मारा है और एसएएफ के १६ से ज्यादा सैनिकों की भी हत्या की।
पिछले एक हफ्ते में देश में सैकड़ों लोग मारे गए, ७० हजार से ज्यादा लोग घर छोड़ने पर मजबूर हुए और दुनिया अब भी खामोश है। गाजा की तबाही को रोकने की चाहत में सूडान की तबाही को नजरअंदाज कर दिया गया। सूडान की आवाज उठाने वाला कोई मुल्क नहीं। हालात ये हैं कि दिन-रात महिलाओं से बलात्कार, हत्या और जिंदा जमीन में दफन करना वहां आम होता जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट में आरोप लग रहा है कि आरएसएफ को संयुक्त अरब अमीरात से ड्रोन और हथियार मिल रहे हैं। हालांकि, यूएई ने इन आरोपों को खारिज किया है। इस गृह युद्ध का आधिकारिक कारण है सत्ता संघर्ष, लेकिन पर्दे के पीछे इसमें कई देशों का हाथ है जो आरएसएफ के जरिए अपने हितों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।

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