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पंचनामा : केंद्र की डिजिटल स्ट्राइक पर सवाल … ओटीटी की सेंसरशिप क्यों नहीं? …बैन से नहीं हल होगा अश्लील मुद्दा 

१८ प्लेटफॉर्म्स, १९ वेबसाइट्स,
१० ऐप्स और ५७ सोशल मीडिया हैंडल्स ब्लॉक होने के बाद उठे प्रश्न

संतोष तिवारी 

ओटीटी (ओवर द टॉप) एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने गुरुवार को अश्लील कंटेंट प्रसारित करने का आरोप लगाते हुए १८ ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया। इसके साथ १९ वेबसाइट्स, १० ऐप्स और ५७ सोशल मीडिया हैंडल्स को ब्लॉक कर दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि ये ऐप्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एंटरटेनमेंट के नाम पर अश्लील और आपत्तिजनक वीडियो पेश कर रहे थे। सरकार ने आगे कहा कि पहले से ही इन ओटीटी ऐप्स को कई बार चेतावनी दी गई थी, इसके बावजूद इनके कंटेंट में किसी तरह का सुधार नहीं पाया गया। इसके पहले १२ मार्च को केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय की बैठक में यह फैसला ले लिया गया था, लेकिन इन ऐप्स की लिस्ट आज जारी की गई है।
सरकार बना रही है नियम 
सरकार द्वारा लाए जा रहे नए प्रस्तावित नियमों के तहत देश में सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को सरकार के पास रजिस्ट्रेशन कराकर सब्सक्रिप्शन लेना होगा। ओटीटी के लिए कड़े कानून लागू होने की वजह से इसका भार यूजर पर पड़ेगा और ओटीटी के सब्सक्रिप्शन प्लान की फीस महंगी हो सकती है। इस नए बिल का मसौदा तैयार हो गया है और इस नए विधेयक में फिलहाल ६ चैप्टर हैं जिनकी ४८ धाराएं और तीन शेड्यूल हैं। केंद्र सरकार ने इस मामले में ९ दिसंबर तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
निष्पक्ष संस्था की आवश्यकता 
इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय दुनियाभर में ओटीटी प्लेटफॉर्म शुरुआती दौर में है। हिंदुस्थान को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि वे कानून बनाते समय लोगों की जरूरतों का ध्यान रखें। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए एक निष्पक्ष नियामक संस्था की आवश्यकता बहुत जरूरी है। निकाय विनियमन के लिए जिम्मेदार सामग्री को अलग करेगा। ओटीटी प्लेटफॉर्म और सरकार इस पर मिलकर काम करेंगे और इस मुद्दे को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे। इस बारे में फेमस अभिनेता अन्नू कपूर चाहते हैं कि ओटीटी पर सेंसरशिप की सख्त जरूरत है। ओटीटी पर लिबर्टी के नाम पर रोजाना सेक्स, वॉयलेंस, गाली-गलौज पर इंडस्ट्री और सरकार अपना रुख तय करे। अन्नू ने कहा था कि ओटीटी को कंट्रोल करने के लिए सेंसरशिप का होना जरूरी है।
पायरेसी के मामले ही बढ़ेंगे
सरकार का कहना है कि तय नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा, लेकिन जानकारों का कहना है कि इस सेंसरशिप से ज्यादा कुछ नहीं बदलेगा, इससे पायरेसी के मामले ही बढ़ेंगे। आम लोग ऐसी सामग्री की तलाश में है जो समाज की सच्चाई को सामने लाती हो, सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों से निपटती हो, हमें क्षेत्रीय विविधता प्रदान करती हो और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी एक वर्ग के लोगों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचती हो, इसलिए इस पर सोच समझकर कदम उठाने चाहिए।

ओटीटी पर कंटेंट चलता है गाली नहीं   
प्रतिबंध से ओटीटी का कोई भविष्य नहीं होगा। ओटीटी पर कंटेंट ही चलता है, गाली-गलौज तो चलता नहीं है। पावरफुल कंटेंट होगा तो चलेगा, फिर उसे किसी भी तरह से दिखाओ। देखिए, फिल्म समाज का एक आईना है। समाज में अच्छी और बुरी दोनों ही चीजें लोग फॉलो करते हैं। जितनी भी चीजें होती है, उसमें कलाकार की नंबर वन पोजीशन आती है, क्योंकि उसे लोग फॉलो करते हैं। वह चीज को अच्छा दिखाता है तो अच्छा और बुरी दिखाता है तो बुरी हो जाती है।
पहलाज निहलानी,  निर्माता-निर्देशक व
सीबीएफसी के पूर्व अध्यक्ष

लोगों के विवेक पर छोड़ देना चाहिए
मेरा मानना है कि वेब सीरीज में गालियां एक हद तक तो ठीक हैं क्योंकि ये गालियां किसी दूसरे ग्रह से नहीं आती हैं। ये हम मनुष्यों के बीच ही जन्म लेती हैं ये हमारे समाज का हिस्सा हैं, और हम सब इससे परिचित हैं नहीं तो इस विषय पर आप मुझसे अपना विचार रखने के लिए नहीं कहते। मेरा स्पष्ट मानना है कि इसे वेब सीरीज बनाने वाले कलाकारों के विवेक पर छोड़ देना चाहिए।
डॉ. सुनील कुमार, न्यूरोलॉजिस्ट

बिना राजनीति के बने इंडिपेंडेंट सेंसर बोर्ड 
कोई भी चीज जो काफी सारे लोगों तक पहुंचती हो उसका चेक इन बैलेंस होना आवश्यक है। आजकल ओटीटी पर जिस तरह का कंटेंट बन रहा है, खासकर महिलाओं को जिस संदर्भ में दिखाया जाता है वह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर राजनीति से हटकर यह निर्णय लिया जाए और एक इंडिपेंडेंट सेंसर बोर्ड बने तो यह ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए सही रहेगा। अगर आप ऑल्ट बालाजी प्रोडक्शन हाउस को देखें तो वह एक तरफ ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ जैसा पारिवारिक शो बनाते हैं तो दूसरी तरफ महिलाओं के संदर्भ में ऐसे अश्लील कंटेंट भी बनाते हैं जिसे देखा नहीं जा सकता है। इसलिए मेरा कहना है कि जो हर क्रिएटिव कंटेंट होते हैं उनका चेक इन बैलेंस होना जरूरी है। ताकि यह देखा जा सके कि वह सोसायटी को किस तरह से प्रभावित करता है? उसके लिए एक इंडिपेंडेंट बॉडी होनी चाहिए जो राजनीति से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
 प्रियंका चतुर्वेदी, सांसद, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)

यहां तो कोई सर्टिफिकेट नहीं है
मुझे तो बहुत ही प्रॉब्लम है। मेरा मानना है कि ओटीटी के ऊपर भी सेंसर होना चाहिए। हमारी फिल्मों में अगर दो पंच भी एक्स्ट्रा हो जाते हैं, वो भी एक्शन में तो उसे ‘ए’ सर्टिफिकेट दे दिया जाता है। ओटीटी पर तो अलग ही तरह का एक्शन चल रहा है, लेकिन यहां पर न तो कोई ए, न बी और न सी किसी तरह का कोई सर्टिफिकेट नहीं है।
सलमान खान, अभिनेता

लेनी होगी नैतिक जिम्मेदारी
यह तय करना मुश्किल है कि ओटीटी प्लेटफार्म्स पर क्या सेंसर किया जाए और क्या छोड़ा जाए। कंटेंट डालते समय हर किसी को नैतिक रूप से जिम्मेदार होना चाहिए। आज की दुनिया में हर चीज में एक बहुत पतली रेखा होती है। उदाहरण के लिए, अगर आप कबाड़ बेचने के क्षेत्र में सेंसरशिप न होने का फायदा उठा रहे हैं, तो यह उचित नहीं है। जब उम्र और सामग्री की बात आती है तो प्रतिबंध बहुत अधिक होने चाहिए। अगर सामग्री किसी व्यक्ति, धर्म या किसी चीज को नुकसान पहुंचा रही है या पारिस्थितिकी तंत्र में गड़बड़ी पैदा कर रही है तो सेंसरशिप  उचित है। आपको नैतिक रूप से जिम्मेदार होना होगा। मैं ऐसी सामग्री नहीं दिखाऊंगा या उसका हिस्सा नहीं बनूंगा, वह भी सिर्फ इसलिए कि इसके लिए एक दर्शक वर्ग है।  सुनील शेट्टी, अभिनेता

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