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जर्जर इमारतों में रहने वालों की सुरक्षा पर दें ध्यान!..आदित्य ठाकरे की मुख्यमंत्री से मांग

सामना संवाददाता / मुंबई

म्हाडा द्वारा हाल ही में जारी किए गए मानसून-पूर्व सर्वेक्षण में ८२ सेस प्राप्त इमारतों को अत्यंत खतरनाक घोषित किया गया है। इन जर्जर इमारतों में रहनेवालों की जान खतरे में है। इसी पृष्ठभूमि में शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इन इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। म्हाडा ने ३० मई २०२६ को यह सूची प्रकाशित की थी, जिसके बाद इन पुरानी और जर्जर इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है।
लोगों के अधिकारों पर आ सकता है संकट!
म्हाडा द्वारा ८२ सेस इमारतों को जर्जर घोषित किए जाने पर उसमें रहनेवाले नागरिकों के लिए शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने चिंता जाहिर की है। इस बारे में उन्होंने सीएम देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। पत्र में आदित्य ठाकरे ने आशंका जताई है कि इन नागरिकों के अधिकारों पर संकट आ सकता है। उन्होंने कहा कि इन सभी अत्यंत खतरनाक घोषित इमारतों में कई मालिक और किराएदार वर्षों से, बल्कि पीढ़ियों से रह रहे हैं। लेकिन इमारतों के खतरनाक घोषित होने का फायदा उठाकर कुछ मकान मालिक, किराएदारों पर दबाव बना सकते हैं। उन्होंने पत्र में कहा है कि मकान मालिकों द्वारा लोगों को जबरन इमारतों से बाहर निकालने की कोशिश की जा सकती है, वहीं प्रशासन की ओर से भी उनके खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई होने की आशंका है।
सीएम तुरंत करें हस्तक्षेप
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि इन सभी इमारतों में रहने वाले मूल निवासियों का उचित रिकॉर्ड तैयार किया जाए। साथ ही, राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि मानसून के दौरान इन नागरिकों के जीवन और आजीविका पर किसी प्रकार का खतरा न आए। उन्होंने कहा कि लोगों को उनके वैध घरों से बेघर नहीं किया जाना चाहिए और उनके मकानों पर मौजूद कानूनी अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहने चाहिए। इसके लिए सरकार को ठोस और स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

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