सना खान
भाई-बहन सिर्फ रिश्ते नहीं होते, वो हमारे बचपन की सबसे गहरी यादें होते हैं। वो रिश्ता, जहां लड़ाई भी होती है, नाराजगी भी और सबसे ज्यादा अपनापन भी। बचपन में जिनसे हर छोटी बात पर झगड़ा होता है, अक्सर बड़े होकर वही लोग हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी आदत बन जाते हैं। कभी खिलौनों के लिए लड़ना, कभी एक-दूसरे की शिकायत करना, कभी गुस्से में कई दिनों तक बात न करना, लेकिन फिर अचानक ऐसे सामान्य हो जाना जैसे कुछ हुआ ही न हो। शायद यही रिश्ता सबसे अलग होता है। भाई-बहन वो होते हैं, जो हमारी आवाज से हमारा दर्द पहचान लेते हैं। जो हमारी खामोशी में भी छिपी बेचैनी समझ लेते हैं। लेकिन सच यह भी है कि हर भाई-बहन का रिश्ता कहानियों जैसा खूबसूरत नहीं होता। कई रिश्तों में प्यार से ज्यादा तुलना होती है। कहीं अपनेपन से ज्यादा अहंकार होता है।
कहीं साथ होने के बाद भी दूरी होती है, तो कहीं खून के रिश्तों में भी अजनबीपन होता है। कई बार माता-पिता का झुकाव, जिम्मेदारियों का बोझ, पैसों की बातें या पुरानी नाराजगियां रिश्तों के बीच ऐसी दीवार बना देती हैं, जहां लोग साथ होकर भी दिल से दूर हो जाते हैं। कुछ भाई-बहन ऐसे भी होते हैं, जो एक-दूसरे की खुशी में खुश नहीं हो पाते। जहां प्यार की जगह ईर्ष्या आ जाती है और अपनापन धीरे-धीरे दिखावा बन जाता है। एक तरफ वो बहन होती है जो अपने भाई को खुशी देने के बजाय, हर बात में उसे तकलीफ देती है, उसकी भावनाओं को समझने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर देती है। और एक तरफ वो भाई होता है, जो अपनी बहन के बारे में कभी बुरा सोच भी नहीं सकता, उसकी आंखों में आंसू तक नहीं देख सकता। और कहीं वही बहन होती है जो अपने भाई की खुशी के लिए खुद के दर्द तक छुपा लेती है। और वही भाई होता है, जो अपनी बहन की इज्जत, खुशी और आंसुओं को अपनी जिम्मेदारी समझता है। कई भाई-बहन ऐसे भी होते हैं, जो पूरी दुनिया के खिलाफ सिर्फ एक-दूसरे के लिए खड़े हो जाते हैं। और कई रिश्ते ऐसे भी होते हैं, जहां लोग साथ रहकर भी एक-दूसरे के खिलाफ जीते रहते हैं। यही फर्क रिश्तों की सच्चाई बताता है। कुछ रिश्ते सिर्फ खून से जुड़े होते हैं और कुछ रिश्ते दिल से। यह सच कड़वा जरूर है, लेकिन हर रिश्ता सिर्फ नाम से मजबूत नहीं होता। कुछ रिश्तों को बचाने के लिए दिल बड़ा रखना पड़ता है। फिर भा हर टूटे रिश्ते के बीच दिल कहीं न कहीं यही चाहता है कि एक बार फिर पहले जैसा सब ठीक हो जाए।
