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आरबीआई की आंखें हैं बंद…! …लोन पर वसूला जा रहा है १२५% ब्याज … दिल्ली हाई कोर्ट भी आया सकते में; दिए जांच के आदेश

बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां जरूरतमंदों को लोन बांटती हैं। आमतौर पर यह १० से १५ फीसदी ब्याज पर दिया जाता है। पर यदि कोई १२५ फीसदी ब्याज की मांग कर दे तो समझो मामला गड़बड़ है। ऐसा ही एक मामला दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा है। अब हाई कोर्ट ने ‘पैसालो डिजिटल’ द्वारा कथित अनुचित लोन देने की जांच करने वाली एक याचिका पर आरबीआई और सेबी से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ‘पैसालो डिजिटल’ लोन पर प्रति वर्ष १२५ फीसदी ब्याज दर ले रहा था, जो कि बहुत ज्यादा और अनुचित है। बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने बताया कि मई २०१९ में १५.९ करोड़ रुपए का बकाया लोन जून २०१९ में बढ़कर २३ करोड़ रुपए हो गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह वृद्धि अत्यधिक ब्याज दरों के कारण हुई है। इस पर सेबी ने कहा है कि वह सिक्योरिटी बाजार में बाजार रेगुलेटर के रूप में कार्य करता है और एनबीएफसी द्वारा दिए गए ऋण की ब्याज दरों या शर्तों को नियंत्रित नहीं करता है। ‘पैसालो डिजिटल’ ने दिल्ली उच्च न्यायालय में लगाए गए आरोपों का जवाब दिया है। एनबीएफसी ने कहा है कि माननीय उच्च न्यायालय ने किसी भी नियामक को अनुचित उधार प्रथाओं की जांच करने का निर्देश नहीं दिया है। यह मामला सत प्रिया महमिया मेमोरियल एजुकेशनल ट्रस्ट से संबंधित है, जिन्होंने २४ मार्च, २०१८ को १२ करोड़ रुपए का लोन लिया था। लोन चुकाने में विफल रहने के बाद, ‘पैसालो डिजिटल’ ने डिफॉल्टर और ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की। एनबीएफसी ने कहा कि वह गिरवी रखी गई जमीन को बेचने की प्रक्रिया में है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने २५ जनवरी २०२४ को आदेश दिया था कि गिरवी रखी गई संपत्तियों की स्थिति में कोई बदलाव न हो। इसका मतलब है कि डिफॉल्टर (जिसने ऋण नहीं चुकाया) और उसके अधिकारी इन संपत्तियों को बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकते। लेकिन डिफॉल्टर और उसके अधिकारी इस आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। वे अवैध रूप से इन संपत्तियों को बेचने और ट्रांसफर करने की कोशिश कर रहे हैं। कंपनी ने सितंबर २०१९ में माना था कि यह संपत्ति नुकसानदायक है और इसे १०० फीसदी घाटे में डाल दिया। इसलिए एनबीएफसी ने कहा कि वह गिरवी रखी गई जमीन को बेचने की प्रक्रिया में है।

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