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महाराष्ट्र अस्मिता की पैरोकार हैं, शिवसेना और राकांपा …हम दूसरे राज्यों में नहीं मांग रहे हैं सीटें -संजय राऊत ने दी जानकारी

सामना संवाददाता / मुंबई
कांग्रेस पार्टी देश की सबसे बड़ी पार्टी है। महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़े दल हैं। देशभर की क्षेत्रीय पार्टियां ‘इंडिया’ गठबंधन एक साथ आई हैं। शिवसेना, राकांपा जैसी पार्टियां राज्य की अस्मिता से जुड़ी हैं। हम राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ या झारखंड में सीटें नहीं मांग रहे हैं। क्षेत्रीय दल अपने राज्यों में अधिक सीटों की मांग करते हैं, क्योंकि इसी पर उनका अस्तित्व, उनके कार्यकर्ता और उनका संघर्ष निर्भर है। इस वजह से हमारे बीच ऐसे कोई मतभेद नहीं हैं। एकाध कोई सीट होता है, उस पर दोनों तरफ के कार्यकर्ता दावा करते हैं। नेताओं से अधिक कार्यकर्ताओं का दबाव होता है। इस तरह की जानकारी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता व सांसद संजय राऊत ने दी।
शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत ने कहा कि मतभेद होने में कोई बुराई नहीं है। महाविकास आघाड़ी में शामिल पार्टियों के अपने-अपने गढ़ हैं। वंचित बहुजन आघाड़ी का भी गढ़ है। ये चारों पार्टियां पूरे महाराष्ट्र में पैâली हुई हैं। इसलिए कार्यकर्ताओं का दबाव नेताओं पर होता है। यह सीट हमारे पास आनी चाहिए, इस तरह की कोशिश कार्यकर्ता करते हैं। जैसे कि भिवंडी सीट एक उदाहरण है। भिवंडी सीट भाजपा ने जीत ली है। अगर हम सब एक साथ आ जाएं तो भिवंडी सीट भाजपा से छीन लेंगे। फिलहाल अब राकांपा कार्यकर्ताओं ने भिवंडी सीट से चुनाव लड़ने का दावा किया है। दूसरी तरफ कांग्रेस का कहना है कि हमें वह सीट चाहिए। इसी तरह एक-दो सीटों पर शिवसेना और कांग्रेस के बीच चर्चा चल रही है। सांसद संजय राऊत ने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह कोई रणनीति नहीं है।
सभी प्रमुख नेता फिर से प्रकाश आंबेडकर से करेंगे चर्चा
प्रकाश आंबेडकर एक सम्मानित नेता हैं। हमने उनसे काफी चर्चा की। उन्होंने सुझाव दिया कि उन्हें महाराष्ट्र में चार सीटों पर चुनाव लड़ना है। प्रकाश आंबेडकर की हमारे साथ उपस्थिति निश्चित रूप से इस तानाशाही के खिलाफ और संविधान को बचाने के संघर्ष को गति के साथ-साथ ताकत देती। लेकिन मैं अब भी आश्वस्त हूं। सभी प्रमुख नेता फिर से प्रकाश आंबेडकर से चर्चा करेंगे।
अच्छी नहीं लगातार रोने की आदत
संजय राऊत ने कहा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी हमारा भाषण ध्यान से सुनते हैं? महाराष्ट्र के एक कोने में भाषण हो रहा होता है, उसमें से दो-चार वाक्य देश के प्रधानमंत्री उठा लेते हैं और उस पर अपनी अगली रणनीति बनाते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में राहुल गांधी ने भाषण दिया। इसमें एक ’शक्ति’ का जिक्र था। मोदी के पीछे एक शक्ति है। अब मोदी उसी शक्ति के नाम पर जप कर रहे हैं। लेकिन राहुल गांधी ने जिस शक्ति का जिक्र किया वो दौलत की ताकत है। ये ईश्वरीय शक्ति नहीं, बल्कि अघोरी शक्ति है, मोदी जी रो रहे थे। मोदी की लगातार रोने की आदत अच्छी नहीं है। वह देश के प्रधानमंत्री हैं। संजय राऊत ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें रोना बंद कर देना चाहिए।

शिवसेना ने हंसते हुए छोड़ी कोल्हापुर की सीट
संजय राऊत ने कहा कि शिवसेना ने हंसते हुए कोल्हापुर सीट छोड़ दी। उन्होंने कहा कि हमें इस बात की पीड़ा हुई कि शिवसेना कोल्हापुर से लोकसभा में नहीं जाएगी। अगर छत्रपति शाहू महाराज कांग्रेस, शिवसेना या राकांपा से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं, तो हम सभी उन्हें वह सीट देंगे। इसलिए हमारे कार्यकर्ता कहते हैं चलो सांगली सीट से चुनाव लड़ें। आखिरकार हम सब इसमें एक साथ हैं। कांग्रेस का कहना है कि ये हमारी पारंपरिक सीट है। ऐसे में अब सांगली की सीट पर चर्चा होगी और बीच का रास्ता निकलेगा। उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि अगर इस बार शिवसेना इस सीट से चुनाव लड़े तो हम यह सीट जीत जाएंगे। हम सांगली सीट के लिए दृढ़ हैं। पश्चिमी महाराष्ट्र में कोल्हापुर की सीट महाविकास आघाड़ी की एकजुटता के लिए दी गई है। इसके बाद हातकणंगले की सीट के लिए राजू शेट्टी से भी चर्चा चल रही है। इसलिए पश्चिमी महाराष्ट्र में हमारी एक सीट होनी चाहिए और हमें इसके लिए मजबूती से लड़ना चाहिए।

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