-एसटीएफ का छापा, सीबीटी परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी बैठाकर कराई जा रही थी परीक्षा; 5.10 लाख नकद, दस्तावेज और मोबाइल बरामद
राजेश सरकार / प्रयागराज
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को तार-तार करने वाले एक संगठित सॉल्वर सिंडिकेट का बड़ा खुलासा करते हुए राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नैनी परिसर स्थित कौशल विकास भवन में छापा मारकर संस्थान के प्रिंसिपल समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 29 जुलाई 2026 को शाम 4:30 बजे और रात करीब 8:45 बजे की गई इस कार्रवाई में परीक्षा पास कराने के नाम पर वसूली गई लाखों रुपये की नकदी, महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। एसटीएफ की इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
एसटीएफ फील्ड इकाई प्रयागराज को कई दिनों से मुखबिरों के माध्यम से सूचना मिल रही थी कि आईटीआई नैनी में 11 जुलाई से 8 अगस्त तक तीन पालियों में आयोजित अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा की कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) परीक्षा में बड़े पैमाने पर सामूहिक नकल कराई जा रही है। आरोप था कि संस्थान के अधिकारी और कर्मचारी मोटी रकम लेकर वास्तविक परीक्षार्थियों के स्थान पर सॉल्वर बैठाकर परीक्षा दिला रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ मुख्यालय ने गिरोह को चिह्नित कर कार्रवाई के निर्देश दिए।
एसपी एसटीएफ शैलेश प्रताप सिंह के पर्यवेक्षण तथा निरीक्षक जयप्रकाश राय के नेतृत्व में प्रयागराज फील्ड इकाई कई दिनों से गोपनीय निगरानी कर रही थी। 29 जुलाई को निरीक्षक अनिल कुमार सिंह, उपनिरीक्षक रानेंद्र कुमार सिंह, विनय तिवारी, गुलजार सिंह सहित एसटीएफ की टीम स्थानीय पुलिस के साथ कौशल विकास भवन पहुंची। तीसरी पाली की परीक्षा के दौरान की गई छापेमारी में कई सॉल्वर मूल अभ्यर्थियों के स्थान पर ऑनलाइन परीक्षा देते हुए पकड़े गए।
ऐसे चलता था परीक्षा माफिया का खेल
पूछताछ में सामने आया कि संस्थान के कार्यदेशक एवं परीक्षा प्रभारी रवि प्रकाश को प्रिंसिपल अशोक कुमार ने परीक्षा की जिम्मेदारी दी थी। पढ़ाई में कमजोर अभ्यर्थियों से प्रति अभ्यर्थी चार हजार रुपये लेकर उनके स्थान पर अलग कमरे में बैठाए गए सॉल्वरों से परीक्षा दिलाई जाती थी।
जांच में खुलासा हुआ कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन धीरंजन कुमार करता था, जो पहले आईटीआई नैनी में अनुदेशक रह चुका है और वर्तमान में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, बांदा में तैनात है। वह मोबाइल के माध्यम से आईटीआई नैनी में कार्यरत अनुदेशक फूल प्रकाश से संपर्क कर सॉल्वर भेजता था। परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों से रकम वसूलने का काम फूल प्रकाश और अनुदेशक राजकुमार मौर्य करते थे। बाद में वसूली गई रकम का बंटवारा प्रिंसिपल समेत गिरोह के अन्य सदस्यों में किया जाता था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि धनराशि का एक हिस्सा उच्च अधिकारियों तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई है, जिसकी जांच एसटीएफ कर रही है।
प्रिंसिपल ने कबूला परीक्षा में धांधली का खेल
गिरफ्तार प्रिंसिपल अशोक कुमार, जो 18 जून 2025 से आईटीआई नैनी में तैनात हैं, ने पूछताछ में स्वीकार किया कि जिले के निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के परीक्षार्थियों की वार्षिक एवं अखिल भारतीय सीबीटी परीक्षा में सॉल्वर गैंग के माध्यम से धन की वसूली की जाती थी।
5.10 लाख नकद सहित बड़ी बरामदगी
एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से 5,10,000 रुपये नकद, परीक्षा से संबंधित 67 महत्वपूर्ण दस्तावेज, छह एंड्रॉयड मोबाइल फोन, तीन आधार कार्ड, एक पेन ड्राइव, तीन पैन कार्ड, सात एटीएम कार्ड तथा तलाशी के दौरान मिले 16,370 रुपये बरामद किए हैं।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों के विरुद्ध थाना नैनी में मुकदमा अपराध संख्या 362/2026 दर्ज किया गया है। मुकदमा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(2) तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 की धारा 8, 10, 11 एवं 13(3)(5) के तहत पंजीकृत किया गया है। एसटीएफ अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा कथित संरक्षण देने वालों की भूमिका की भी गहन जांच कर रही है।
