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अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में स्थायी दोस्ती नहीं, बल्कि केवल हित और अहंकार स्थायी होते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के बदलते रिश्ते इसका ताजा उदाहरण हैं। कभी एक-दूसरे के बेहद करीब दिखने वाले इन दोनों नेताओं के बीच आज भारी तल्खी आ चुकी है।
शुरुआत से विवाद तक का सफर
जनवरी २०२५ में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के समय मेलोनी उनकी सबसे खास यूरोपीय सहयोगी थीं। ट्रंप ने पूरे यूरोप को नजरअंदाज कर मेलोनी को ‘वीआईपी न्योता’ दिया था। लेकिन महज १८ महीनों में यह कूटनीतिक नजदीकी एक सार्वजनिक विवाद में बदल गई।
हाल ही में जी७ शिखर सम्मेलन के बाद, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि मेलोनी सिर्फ एक ‘परफेक्ट फोटो’ के लिए उनके आगे-पीछे गिड़गिड़ा रही थीं। इस पर पलटवार करते हुए मेलोनी ने सोशल मीडिया पर तीखा वीडियो जारी किया और सीधे शब्दों में कहा, ‘ये कहानियां मनगढ़ंत हैं। डोनाल्ड ट्रंप याद रखें कि इटली और मेलोनी कभी भीख नहीं मांगते!’ इस विवाद के चलते इटली के विदेश मंत्री ने अपना अमेरिका दौरा तक रद्द कर दिया।
क्यों आई रिश्ते में खटास
इस दोस्ती के टूटने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण रहे,
पोप का अपमान
जब ईसाई धर्मगुरु पोप लियो XIV ने ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियानों की आलोचना की, तो ट्रंप ने उन्हें ‘कमजोर’ कह दिया। कैथोलिक राजनीति करने वाली मेलोनी ने इसे वेटिकन का अपमान माना।
स्वतंत्र विदेश नीति
मेलोनी ने यूक्रेन और ईरान के मुद्दों पर अमेरिका से अलग स्वतंत्र रुख अपनाया। इससे नाराज होकर ट्रंप ने इटली से अमेरिकी सैनिक हटाने की धमकी दी, जिस पर मेलोनी ने भी तीखा तंज कसा।
