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मुद्दे की बात दबा डाली! … चुनाव आयोग ने तय समय सीमा से एक दिन पहले, अधूरी जानकारी की सार्वजनिक

जनता का आरोप; यह सर्वोच्च न्यायालय की आंखों में धूल झोंकने जैसा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

चुनाव आयोग ने तय सीमा से एक दिन पहले ही चुनावी बॉन्ड से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक कर दी है। पर यह जानकारी अधूरी है। इस जानकारी में चुनाव आयोग ने या यूं कहें एसबीआई ने मुद्दे की बात दबा डाली है। इस लिस्ट से इस बात का बिल्कुल पता नहीं चलता है कि किस कंपनी ने किस पार्टी को चंदा दिया।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद एसबीआई ने अगले ही दिन एक पेन ड्राइव में दो पीडीएफ फॉर्मेट चुनाव आयोग को सौंप दिए थे। इसे सार्वजनिक करने की डेडलाइन आज १५ मार्च थी। पर चुनाव आयोग ने इसे एक दिन पहले ही अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। इस सार्वजनिक लिस्ट को देखकर जनता काफी मायूस हो गई है और आम लोगों के बीच यही चर्चा है कि यह सर्वोच्च न्यायालय की आंखों में धूल झोंकने का काम किया गया है।
बता दें कि किस्तों में मिली जानकारी के मुताबिक बैंक द्वारा आयोग को दिए गए आंकड़े बुनियादी यानी रॉ इन्फोर्मेशन के रूप में हैं। कब, किसने, कितनी राशि के किस पार्टी के लिए ये चुनावी बॉन्ड्स खरीदे, इस बात की जानकारी नहीं मिलती। बता दें कि चुनाव आयोग द्वारा सार्वजनिक किए गए डेटा से १२ अप्रैल २०१९ के बाद से १,००० रुपए से १ करोड़ रुपए के मूल्यवर्ग यूज किए चुनावी बॉन्ड की खरीद का पता चलता है। यह जानकारी कंपनियों और व्यक्ति विशेष दोनों द्वारा की गई खरीद को भी दर्शाती है। एक लिस्ट में कंपनियों द्वारा चुनावी बॉन्ड्स की खरीद की जानकारी है और दूसरी लिस्ट में राजनीतिक दलों द्वारा उसे भुनाए जाने का जिक्र है। पर किस कंपनी ने किस पार्टी को चंदा दिया इसकी जानकारी नहीं मिलती, जो कि इस पूरे मामले का प्रमुख मुद्दा था। दोपहर का सामना ने कल ही आशंका प्रकट की थी कि प्रजातंत्र को पंगु बनाने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त चुनावी चंदे के खुलासे में कोई पेच लगा सकते हैं और इस सार्वजनिक लिस्ट से चंदा देनेवाले और लेनेवाले के बीच संबंध का स्थापित न होना, इस बात की पुष्टि करता है।

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