कविता श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की सड़क पर जलभराव में एक मर्सिडीज डूबने से बिगड़ गई। गाड़ी को दुरुस्त कराने के लिए ट्रॉली में रखकर ले जाना पड़ा। महंगी गाड़ी की मरम्मत भी महंगी पड़ती है। उसके मालिक को पांच लाख का खर्च आया। अब उसने इसके लिए गाजियाबाद म्युनिसिपल कमिश्नर को जिम्मेदार ठहराते हुए पांच लाख रुपए हर्जाना देने की नोटिस भेजी है। यह कोई मजाक नहीं है। उन्होंने कानूनन लीगल नोटिस जारी की है और कहा कि १५ दिनों में जवाब नहीं मिला तो वे हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे। स्थानीय सड़कों की देखभाल, उनके रख-रखाव आदि की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होती है। सड़कों पर अतिक्रमण रोकना भी उसका ही काम है। जल निकासी की व्यवस्था करने के लिए भी अधिकारी जिम्मेदार होते हैं। यदि इन सबकी अनदेखी हो रही है और आम जनमानस सुरक्षित नहीं है, उन्हें नुकसान हो रहा है तो निश्चित रूप से इसकी जवाबदेही तो बनती है। मर्सिडीज के मालिक का कहना सही है कि सड़क की देखभाल और लोगों के जानमाल की रक्षा करने के लिए अकाउंटेबिलिटी किसकी है, यह तय होना चाहिए। नागरिकों की खामोशी ही प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है। यह घटना पूरे देश में स्थानीय प्रशासनों की लापरवाही और सड़क के काम में होनेवाले भ्रष्टाचार के प्रति आंखें खोलती है। यदि मुंबई व अन्य बड़े शहरों में वाहनचालक केवल ट्रैफिक जाम के लिए इस तरह के दावे ठोकना चालू करें तो न जाने कितने लिटिगेशन सामने आएंगे। यह भले ही साधारण सी और आम सी शिकायत लगती हो, लेकिन यह बहुत बड़ी और गंभीर समस्या है। इस पर प्रशासन की जवाबदेही तय कर देना ही काफी नहीं है, उसके कान खींचने का काम भी होना चाहिए। गाजियाबाद के मामले में मर्सिडीज के मालिक द्वारा पांच लाख रुपए का दावा ठोकने से कमिश्नर हैरान जरूर हुए होंगे। यह उन्हें ही नहीं, बल्कि सभी प्रशासनिक अधिकारियों के लिए संकेत है कि वे अपने कार्य के प्रति दक्षता रखें और नागरिकों के हकों पर ध्यान दें, जो उनकी ड्यूटी का सबसे महत्वपूर्ण काम है।
ट्रंप का झटका
अमेरिका द्वारा आज से भारतीय उत्पादों पर २५ प्रतिशत टैरिफ लगाना हमारे निर्यात को प्रभावित करेगा। इससे हमारी जीडीपी ०.२ प्रतिशत से ०.५ प्रतिशत तक गिर सकती है। इस टैरिफ से हम वियतनाम और चीन की तुलना में और कमजोर हो जाएंगे, जो निवेश और औद्योगिकीकरण के लिए हमारे मुख्य प्रतिस्पर्धी हैं। ऑटो, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और जेम्स-ज्वैलरी का निर्यात करनेवाले महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में मौजूद निर्यात हब डगमगाएंगे यह तय है।
