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शिंदे गुट और भाजपा में बढ़ रही है तनातनी… ‘छोटे शिंदे’ के बड़े बोल से ‘कमलवाले’ हुए क्रोधित!

बारामती की ‘दादा’ गिरी के बाद नासिक में नस्तर
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसके पहले मुख्यमंत्री के पुत्र डॉ. श्रीकांत शिंदे यानी ‘छोटे शिंदे’ के बड़े बोल के कारण ‘कमलवाले’ क्रोधित हो गए है। शिंदे गुट की बारामती की ‘दादा’ गिरी के बाद नासिक लोकसभा सीट पर दावा ठोंक दिया है। जिसके कारण भाजपा और शिंदे गुट में तनातनी बढ़ती जा रही है। बता दें कि श्रीकांत शिंदे ने नासिक लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार के नामों की घोषणा कर दी है। जिसको लेकर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में नाराजगी व्याप्त है। बताया जाता है कि श्रीकांत शिंदे ने गत मंगलवार को नासिक में शिंदे गुट की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में नासिक के मौजूदा सांसद हेमंत गोडसे भी मौजूद थे। श्रीकांत शिंदे ने अपने भाषण में हेमंत गोडसे के काम की सराहना करते हुए नासिक से उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नासिक लोकसभा सीट से शिंदे गुट के उम्मीदवार होंगे और तीसरी बार लोकसभा में भेजा जाएगा। श्रीाकांत शिंदे द्वारा हेमंत गोडसे के नाम की घोषणा करना स्थानीय भाजपा नेताओं को पसंद नहीं आया। भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी दिनकर पाटील ने श्रीकांत शिंदे की घोषणा का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि लोकसभा की सीटों का वितरण किया जाएगा, पार्टी के वरिष्ठजन इस पर निर्णय लेंगे। उसके बाद घोषित निर्णय को अंतिम निर्णय माना जाएगा। श्रीकांत की घोषणा स्वीकार्य नहीं है।

बागियों को लड़ाकर मजा ले रही है भाजपा
शिवसेना और राकांपा से गद्दारी करके भाजपा में शामिल होने वाले शिंदे गुट और अजीत दादा गुट को भाजपा ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा ने अजीत पवार गुट को स्पष्ट शब्दों में बता दिया है कि चार से अधिक सीटें नहीं दी जा सकती। भाजपा की ओर से मिले इस स्पष्ट जवाब से अजीत पवार की बोलती बंद हो गई है और चार सीटों पर ही वे संतोष करने को राजी हो गए हैं। बताया जाता है कि भाजपा दोनों बागियों को आपस में लड़ाकर मजा ले रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अजीत पवार गुट को बारामती, रायगढ़, शिरूर और परभणी की सीट दी जाएगी। वहीं खबर है कि भाजपा ३७ सीटों पर चुनाव ़लडेगी, जबकि शिंदे गुट को नौ सीटें देगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अजीत पवार बारामती से अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को चुनाव मैदान में उतारेंगे तो रायगढ़ से अजीत पवार सांसद सुनील तटकरे को उम्मीदवार बना सकते हैं, ये यहां से इस वक्त मौजूदा सांसद हैं और दादा गुट के अध्यक्ष हैं। वहीं परभणी से वर्तमान सांसद राजेश विटेकर को टिकट देने की संभावना व्यक्त की जा रही है। वही शिंदे गुट के सांसदों में इस बात को लेकर बेचैनी बढ़ी हुई है कि महायुति में भाजपा केवल नौ सीटें दे रही है, इस स्थिति में किसका पत्ता कटेगा, इसको लेकर बेचैनी मची हुई है। शिंदे गुट के केवल मुख्यमंत्री के सुपुत्र डॉ. श्रीकांत शिंदे की कल्याण लोकसभा की सीट निश्चित है। इसके अलावा अभी तक कोई सीट निश्चित नहीं है। इसको लेकर शिंदे गुट के वर्तमान सांसद काफी बेचैन हैं।
बारामती में बगावत का बिगुल
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे गुट के पूर्व विधायक विजय शिवतारे ने बारामती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का एलान करके बगावत का बिगुल बजा दिया है। शिवतारे ने कहा कि वे निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में उतरेंगे। उन्होंने अजीत पवार पर निशाना साधते हुए कहा कि बारामती किसी की जागीर नहीं है। इसके साथ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मैं महायुति के खिलाफ नहीं, लेकिन बारामती के राज घराने के खिलाफ हूं। शिवतारे ने कहा कि बारामती की जनता अजीत पवार के खानदान से त्रस्त हो चुकी है। कोई भी व्यक्ति सुनेत्रा पवार को वोट नहीं देना चाहता। किसी को तो पवार के खिलाफ हिम्मत करनी पड़ेगी। पूर्व विधायक विजय शिवतारे ने आगे कहा, मैंने २०१९ के चुनाव में अजीत पवार के बेटे के खिलाफ प्रचार किया था, लेकिन मैंने इसे राजनीति और अपने कर्तव्य के हिस्से के रूप में किया, व्यक्तिगत नहीं किया था, उन्होंने यह भी कहा, अगर मैं महाराष्ट्र में किसी को गिराने की ठान लूं तो मैं किसी के बाप से नहीं डरता और गिराकर ही दम लूंगा’।
बता दें, महाराष्ट्र में अब तक लग रहा था कि बारामती सीट पर सुप्रिया सुले बनाम सुनेत्रा पवार के बीच मुकाबला हो सकता है। लेकिन शिंदे गुट के नेता के एलान के बाद से अब एक और उम्मीदवार मैदान में आ गया है। अब क्या ये मुकाबला त्रिकोणीय होगा या पवार बनाम पवार… ये समय आने पर ही पता चलेगा। उन्होंने सासवड में एक प्रेस कॉन्प्रâेंस में घोषणा की कि बारामती से चुनाव लड़ने के संदर्भ में सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया गया है और बारामती लोकसभा में त्रिकोणीय मुकाबले के संकेत हैं।
दादा का टेंशन बढ़ा
शिंदे गुट के विजय शिवतारे के एलान के बाद अजीत पवार की टेंशन बढ़ गई है। शिवतारे ने एक प्रेस कॉन्प्रâेंस में अजीत पवार की आलोचना की। शिवतारे ने यह भी कहा कि बारामतीrकरों की राय है कि अजीत पवार उन्मत्त हैं और वे अजीत पवार के बजाय सुप्रिया सुले को वोट देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अजीत पवार सभ्यता के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि जब मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं था तो मैंने एम्बुलेंस में प्रचार किया। तब अजीत पवार ने कहा था कि अगर मरना ही है तो चुनाव क्यों लड़ रहे हो। पवार ने कहा था कि वे झूठ बोल रहे हैं और लोगों की सहानुभूति ले रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मैं देखूंगा कि आप वैâसे निर्वाचित होते है। उन्होंने इस प्रकार की निचले स्तर की भाषा का प्रयोग किया था।
बाबासाहेब की व्यवस्था पर हो रहा है हमला
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें एहसास हुआ कि डा.बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा बनाई गई व्यवस्था पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुरंदर के लोगों का कहना है कि हम दादा से बदला लेना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम यह चुनाव लड़ेंगे ताकि आम मतदाता जो वंशवाद में विश्वास नहीं करते उन्हें वोट देने का अधिकार मिल सके।

 

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