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सीटों की लड़ाई, जल्दी सुलझाओ भाई … फडणवीस, शिंदे और सुनेत्रा अड़े! …विधान परिषद का घमासान

-शाह के दरबार में खींचतान
सामना सांवददाता / मुंबई
महाराष्ट्र विधान परिषद की १७ सीटों के बंटवारे को लेकर महायुति में अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। फडणवीस के फंदे में फंसे शिंदे फड़फड़ा रहे हैं। फडणवीस ने शिंद को चारों ओर से घेर लिया है। शिंदे को सीमित सीटों पर ही निपटाने का फडणवीस ने मन बनाया है। ऐसे में शिंदे पूरी तरह से हताश नजर आ रहे हैं। उन्होंने इस मामले में दिल्ली जाकर शाह से शिकायत भी की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक, शाह ने तीनों को दरबार में बुलाया है। मगर वहां तीनों ही अपनी बात पर अड़े हुए हैं।
बता दें कि १७ में से ६ सीटों पर एकनाथ शिंदे अड़े हैं, वहीं सुनेत्रा भी ३ सीटों की मांग कर रही हैं। इस मसले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और एकनाथ शिंदे पिछले दो दिनों से दिल्ली में हैं, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। दिल्ली में केंद्रीय नेताओं से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए शिंदे ने राजनीतिक बैठकों की अटकलों को खारिज करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली राजनीति करने नहीं आया हूं। राज्य के विकास कार्यों और लंबित परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से चर्चा करने आया हूं।
इतना सवाल क्यों?
शिंदे ने विपक्ष और पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हम दो दिनों से दिल्ली में हैं तो इतना सवाल क्यों उठ रहा है? हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा यही है कि विधान परिषद सीटों के बंटवारे को लेकर महायुति में सब कुछ सामान्य नहीं है और अंतिम फॉर्मूले पर मुहर लगाने के लिए अब दिल्ली नेतृत्व को दखल देना पड़ रहा है।

सोने के भाव में ‘ठाकुर’ नगरसेवक
ठाणे विधान परिषद सीट को लेकर भाजपा और शिंदे गुट आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि स्थानीय निकायों में भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल है और अगर अभी पार्टी ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा, तो फिर कब उतारेगी? भाजपा नेताओं का तर्क है कि नगरसेवकों की ताकत का इस्तेमाल पार्टी विस्तार के लिए किया जाना चाहिए। जिसके चलते वसई-विरार की सत्ता संभालने वाली बहुजन विकास आघाड़ी का इस चुनावी समीकरण में बेहद अहम रोल हो गया है। बविआ के पास मौजूद ७१ वोट अब जीत-हार तय करने वाले माने जा रहे हैं। यही वजह है कि भाजपा और शिंदे गुट दोनों ही बविआ को साधने में जुट गए हैं। बविआ के नगरसेवकों का भाव सोने के भाव की तरह बढ़ गया है। खबर है कि दोनों तरफ से बविआ के ठाकुर परिवार पर डोरे डाले जा रहे हैं।

कई कांग्रेस नगरसेवक ‘नॉट रीचेबल’!
वडेट्टीवार का बड़ा आरोप
सामना संवाददाता / मुंबई
भाजपा पर नगरसेवकों की ‘खरीद-फरोख्त’ और ‘किडनैपिंग जैसी राजनीति’ करने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने दावा किया है कि विदर्भ के कई कांग्रेस नगरसेवक ‘नॉट रीचेबल’ हैं और उन्हें धनबल के जरिए तोड़ा जा रहा है।
वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि करीब लगभग दो दर्जन नगरसेवक संपर्क से बाहर हैं और उन्हें भाजपा के संपर्क में ले जाया गया है। उन्होंने दावा किया कि प्रत्येक नगरसेवक के लिए १५ लाख रुपए तक की बोली लगाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जब विधायक ‘ठेकेदार’ बन जाते हैं और सत्ता व आर्थिक ताकत दोनों एक साथ आ जाती हैं, तब राजनीति की नैतिकता खतरे में पड़ जाती है। वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि महायुति की ओर से धनबल और सत्ता बल के सहारे चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि विधान परिषद चुनाव जीतने के लिए सत्ता और पैसों का खुला इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगरसेवकों को धनबल और दबाव के जरिए अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है। वडेट्टीवार के मुताबिक, कुछ जनप्रतिनिधियों और उनके परिवारों को जांच, जेल और प्रशासनिक कार्रवाई का डर दिखाकर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘सत्ता की धाक दिखाकर और धमकी देकर राजनीति की जा रही है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उनके पास नगरसेवकों को पैसे दिए जाने के सबूत मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को ‘एडवांस’ रकम दी गई है, जबकि आगे और अधिक रकम देने की चर्चा चल रही है।

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