महिलाएं ज्यादा परेशान ठेकेदारों की दादागीरी के खिलाफ कार्रवाई करो
सुरेश गोलानी / मुंबई
एक तरफ जहां सरकार खुले में शौच से मुक्ति, घर-घर और स्वच्छ सामुदायिक (सार्वजनिक) शौचालयों के बड़े-बड़े दावे कर रही है, मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। भायंदर-पश्चिम स्थित झुग्गी बस्तियों में रहने वाले हजारों परिवार-खासकर महिलाओं के लिए सामुदायिक शौचालय सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। भाजपा के पूर्व नगरसेवक एड. रवि व्यास द्वारा मनपा आयुक्त राधा बिनोद शर्मा को लिखे शिकायत पत्र के अनुसार, भायंदर के प्रभाग क्रमांक १ में स्थित गणेश देवल नगर, जय अंबे नगर, नेहरू नगर, शास्त्री नगर, भोला नगर, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर नगर और मूर्धा खाड़ी में मनपा ने सामुदायिक शौचालयों का निर्माण तो कर दिया, पर उनके रख-रखाव के लिए नियुक्त ठेकेदारों की कथित मनमानी और दादागीरी के कारण लोग पानी से वंचित हैं। ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए व्यास ने कहा, ‘सुबह के वक्त जब शौचालय में पानी नहीं होगा, तो नागरिक या तो घर से पानी लाएं या फिर खुले में शौच करने के लिए मजबूर हो सकते हैं, जो कि स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए हानिकारक है।’ टेंडर में अंकित नियमों के अनुसार, सामुदायिक शौचालयों को स्वच्छ रखना ठेकेदार की जिम्मेदारी है। ठेकेदार को यह सुनिश्चित करना होता है कि शौचालय साफ-सुथरे रहें और सभी आवश्यक सुव्िाधाएं, जैसे पानी और बिजली हर समय उपलब्ध हों। आरोप है कि मनपा शौचालयों के रख-रखाव के लिए प्रति वर्ष करोड़ों रुपए खर्च तो करती है, पर स्वच्छता निरीक्षकों की ठेकेदारों के साथ कथित मिलीभगत के कारण वे खुलेआम हो रही इन अनियमितताओं को अनदेखा कर उन पर कोई कार्रवाई नहीं करते।
