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ड्रैगन के सामने भी रुपया हुआ सरेंडर! …युआन दिनों-दिन हो रहा मजबूत

हिंदुस्थान का बढ़ेगा संकट, चीन को बंपर फायदा
सामना संवाददाता / मुंबई
डॉलर के मुकाबले तो रुपया लुढ़क ही रहा है, अब उसने ड्रैगन के सामने भी सरेंडर करना शुरू कर दिया है। युद्ध के कारण इस समय वैश्विक उथल-पुथल मची हुई है। इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। अब तो रुपया चीन की मुद्रा युआन के मुकाबले भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है।
इस गिरावट से चीन से आने वाला जरूरी सामान बेहद महंगा हो गया है, जिससे देश में चौतरफा महंगाई और रिकॉर्ड व्यापार घाटे का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वहीं चीन को इससे फायदा हो रहा है।

चीनी युआन के मुकाबले ८ फीसदी टूटा रुपया!
-चीन से आयात करना हुआ महंगा

चीनी मुद्रा युआन के सामने रुपया तेजी से लुढ़कता जा रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, जनवरी २०२६ से लेकर अब तक चीनी युआन के मुकाबले भारतीय रुपया करीब ८ फीसदी तक टूट चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रुयया के लुढ़कने के पीछे मुख्य कारण है हिंदुस्थान और चीन के बीच का ट्रेड डेफिसिट लगातार बढ़ना। वित्त वर्ष २०२५ में भारत ने चीन से ११५ से १२० अरब डॉलर का भारी-भरकम आयात किया, जबकि निर्यात महज १४.५ अरब डॉलर का रहा। जहां डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया दबाव में है, वहीं चीनी करेंसी युआन ने गजब की मजबूती दिखाई है। इस साल चीनी युआन डॉलर के मुकाबले २ से ३ फीसदी मजबूत हुआ है।
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका और युद्ध के हालातों के चलते कच्चा तेल १०० डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जिससे भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ गया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से इस साल अब तक २.२ लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं, जबकि साल २०२५ में यह बिकवाली १.६ लाख करोड़ रुपए थी।

१० फीसदी तक महंगा हुआ चीनी सामान
पहले जहां १ चीनी युआन की कीमत लगभग १२.८ से १३ रुपए के बीच थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब १४ से १४.२ रुपए के स्तर पर पहुंच गई है। इसका मतलब है कि भारतीय आयातकों को अब चीनी सामान के लिए ८ से १० फीसदी ज्यादा रकम चुकानी पड़ रही है। इससे चीन का खजाना भर रहा है। अगर वर्ष २०२५ के १२० अरब डॉलर के आयात को आधार मानें तो युआन के मुकाबले रुपए में हुई ७ फीसदी की गिरावट के कारण भारत पर करीब ८.४ अरब डॉलर (करीब ८०,७०० करोड़ रुपए) का एक्स्ट्रा इनपुट कॉस्ट का बोझ आ चुका है।

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