-म्हाडा ने अतिसंकटग्रस्त घोषित की बिल्डिंग
-२,७३६ लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में मानसून की दस्तक से पहले म्हाडा ने शहर की जर्जर इमारतों को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। मुंबई भवन मरम्मत एवं पुनर्रचना मंडल द्वारा किए गए सर्वेक्षण में शहर द्वीप क्षेत्र की ८२ इमारतों को अतिसंकटग्रस्त घोषित किया गया है। इन इमारतों की स्थिति इतनी खराब बताई गई है कि भारी बारिश या तेज हवाओं के दौरान इनके ढहने का गंभीर खतरा बना हुआ है।
म्हाडा के अनुसार, इन इमारतों में कुल २,७३६ लोग रहते हैं या उनका उपयोग करते हैं। इनमें २,२५६ निवासी और ४८० अनिवासी किरायेदार शामिल हैं। प्रशासन को आशंका है कि लगातार बारिश के दौरान इन इमारतों की संरचना और कमजोर हो सकती है, जिससे बड़े हादसे की संभावना बढ़ जाएगी। खतरे को देखते हुए १७६ निवासियों को इमारतें खाली करने के नोटिस जारी किए गए हैं। अब तक २९ लोग म्हाडा के अस्थायी शिविरों में स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि ३६ परिवारों ने स्वयं वैकल्पिक आवास की व्यवस्था कर ली है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी इन भवनों में रह रहे हैं।
म्हाडा ने करीब २,१०२ लोगों को ट्रांजिट वैंâप में स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर और नोटिस जारी किए जाएंगे तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाएगा। गिरगांव, कालबादेवी, माझगांव, नागपाड़ा, कामाठीपुरा, दादर और माहिम जैसे पुराने इलाकों की कई इमारतें इस सूची में शामिल हैं। इनमें से कई इमारतें दशकों पुरानी हैं और लंबे समय से पुनर्विकास या मरम्मत की प्रतीक्षा कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान दीवारों और नींव में पानी पहुंचने से इमारतों की मजबूती तेजी से घटती है। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। म्हाडा ने नागरिकों से अपील की है कि वे सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन का सहयोग करें और समय रहते सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
सबसे ज्यादा खतरा इन इलाकों में
गिरगांव, कालबादेवी, माझगांव, नागपाड़ा, कामाठीपुरा, दादर और माहिम के कई पुरानी इमारतें जोखिम की श्रेणी में हैं। इनमें अधिकांश इमारतें दशकों पुरानी हैं। लगातार बारिश, कमजोर ढांचा और अधूरी मरम्मत इन्हें मानसून के दौरान औरे अधिक संवेदनशील बना रही है।
