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मुस्लिम वर्ल्ड : जंग को जिहाद में बदलने की तैयारी! … ईरान की नई प्लानिंग क्या?

सूफी खान

ईरान की कोशिश है कि ये लड़ाई अब ईरान-इजरायल के बीच की न रहकर मुस्लिम मुल्कों और इजरायल की बन जाए। दरअसल अमेरिका और इजरायल ईरान में रहबर कहे जाने वाले सुप्रीम लीडर सैय्यद आयतुल्लाह अली खामेनेई को खत्म करने की फिराक में हैं। इसका एलान बाकायदा तौर पर पीएम नेतन्याहू ने मीडिया में तब किया भी था जब ईरानी मिसाइलें इजरायल पर भारी कहर बरपा रही थीं। उस वक्त पीएम नेतन्याहू ने कहा था कि अब ये जंग खामेनेई को मारकर ही खत्म होगी।
अपने सुप्रीम लीडर के लिए इस तरह की बातें और खुली धमकियों को ईरान ने बेहद गंभीरता से लिया है। कहा जा रहा है कि वहां इस बात को लेकर आईआरजीसी और अवाम में बेहद गुस्सा पाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से ताजा खबर ये है कि इमाम खामेनेई को खत्म करने की प्लानिंग के सिलसिले में नई प्लानिंग शुरू हो चुकी है, इसी सिलसिले में पीएम नेतन्याहू प्रेसिडेंट ट्रंप से मुलाकात करने अमेरिका जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर किसी सुरक्षित बंकर में हैं और सिपाह ए वली ए अम्र के १२ हजार स्पेशल गार्ड उनकी सुरक्षा में तैनात हैं। मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि इजरायल की खुली धमकी से गुस्साए खामेनेई का भी पहला टारगेट पीएम बेंजामिन नेतन्याहू हैं, वो इसलिए क्योंकि उन्होने ईरान पर पहले अटैक कर सुप्रीम लीडर का गुस्सा बढ़ा दिया है, दूसरे टारगेट पर हैं डोनाल्ड ट्रंप, जिनके हुक्म पर ही ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला हुआ। खामेनेई के निशाने पर सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन जैसे अमेरिका के मददगार अरब मुल्क भी हैं। इजरायल और अमेरिका के खिलाफ ईरान में अब जिहाद का एलान हो गया है। जिहाद को लेकर फतवे भी आ गए हैं। इजरायल के खिलाफ सबसे पहले इमाम आयतुल्लाह खामेनेई ने ही पहला फतवा जारी किया था। इसके बाद इराक के ग्रेंड आयतुल्लाह सीस्तानी ने भी कहा था कि खामेनेई को किसी ने भी छुआ तो बवाल हो जाएगा। हाल ही में ईरान के मजहबी रहनुमा आयतुल्ला नासिर मकारिम शिराजी ने नेतन्याहू और ट्रंप के खिलाफ फतवा जारी किया, कहा कि ये दोनों नेता अल्लाह के दुश्मन हैं, दुनिया के सभी मुस्लिम एकजुट होकर इन नेताओं को ईरान पर हमले के लिए पछताने के लिए मजबूर करें।

कौन-कौन होगा ईरान के साथ
गौरतलब है कि जिहाद एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है `प्रयास करना’ या `संघर्ष करना।’ इस्लाम में जिहाद के मायने हैं अल्लाह के रास्ते पर संघर्ष और इसके कई अर्थ हो सकते हैं, जिनमें आध्यात्मिक संघर्ष, नैतिक संघर्ष और आत्मरक्षा के लिए युद्ध भी शामिल हैं। अब देखना होगा कि जिहाद के नाम पर कितने अरब और मुस्लिम मुल्क ईरान के साथ आते हैं और ये जंग किस हद तक बढ़ती है।

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