-कोर्ट में घसीटने तक का लिया निर्णय
-मंत्री छगन भुजबल ने दिए संकेत
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में लाडली बहनों को झांसा देकर सत्ता में आई महायुति सरकार आर्थिक संकट से गुजर रही है। इस बुरे आर्थिक दौर से झल्लाई महायुति सरकार ने अब उल्टे-सीधे फैसले लेना शुरू कर दिया है। इसी के तहत अब उसने अमीर लाडली बहनों पर कार्रवाई की योजना बनाई है, जो लाडली बहनें अब तक योजना का फायदा उठाते आई हैं। राज्य के वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबल ने इसका संकेत भी दे दिया है।
भुजबल ने यह कहकर लाडली बहनों को झटका दिया है कि इस योजना में अमीर बहनों ने घुसपैठ की है, जबकि यह योजना उनके लिए नहीं है। जिनके पास गाड़ी, बंगला है। उन्हें इस योजना का लाभ नहीं लेना चाहिए। उधर, उनके इस बयान से विपक्ष खफा हो गया है। विपक्ष ने सवाल खड़ा किया है कि चुनाव के समय तो इन्हें अमीर और गरीब बहनों में फर्क नहीं दिखा, अब क्यों अमीरी के नाम पर कुछ बहनों को इस योजना के लाभ से वंचित कर रहे हैं।
नासिक जिले में मीडिया से बात करते हुए भुजबल ने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि वे खुद ही बता दें कि मैं इन नियमों में फिट नहीं बैठती हूं। इतना कहने के बावजूद भी अगर अमीर बहनें इसमें बने रहती हैं तो यह परेशानी की बात है। अब भी जिनके पास गाड़ियां, बंगले हैं, उन्हें इस योजना से पीछे हट जाना चाहिए, ऐसा आह्वान भुजबल ने किया। अब तक जिन लोगों को लाभ मिल चुका है, उन पर कोई और कार्रवाई न हो, इसके लिए मैं प्रयास करूंगा। भुजबल ने कहा जो लोग इन नियमों में फिट नहीं होते, कृपया रुक जाएं। जिनको सच में जरूरत है।
बता दें कि मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना २८ जून २०२४ को शुरू करने की मंजूरी मिली थी। इस योजना के माध्यम से महाराष्ट्र की २१ से ६५ आयु वर्ग की पात्र महिलाओं को हर महीने १,५०० रुपए की आर्थिक सहायता सीधे खाते के जरिए दी जा रही है।
अब तक योजना का लाभ ले चुकीं अमीर बहनों के लिए अब मुसीबत खड़ी हो सकती है। सरकार ने इन बहनों के खिलाफ जहां मामला दर्ज कर कोर्ट में घसीटने का निर्णय लिया है तो वहीं उनके लिए दंडात्मक कार्रवाई के भी प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने जांच भी शुरू कर दी है। कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने कहा कि जब सरकार को बहनों पर कार्रवाई करनी थी तो उन्हें लाभ ही क्यों दिया? सरकार को पहले क्यों नहीं समझ में आया?
इन्हें मिलेगा लाभ
महाराष्ट्र राज्य का निवासी होना चाहिए। राज्य की विवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता और निराधार महिलाएं तथा परिवार की केवल एक अविवाहित महिला। न्यूनतम आयु २१ वर्ष पूरी हो और अधिकतम आयु ६५ वर्ष पूरी होने तक। लाभार्थी का आधार से लिंक्ड बैंक खाता होना चाहिए। लाभार्थी के परिवार की वार्षिक आय २.५० लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।
इन्हें लाभ नहीं मिलेगा
जिनके परिवार की संयुक्त वार्षिक आय २.५० लाख रुपए से अधिक है, जिनके परिवार में कोई सदस्य आय करदाता है। जिनके परिवार में कोई सदस्य नियमित- स्थायी कर्मचारी के रूप में सरकारी विभाग-उपक्रम व राज्य सरकार की स्थानीय संस्थाओं में कार्यरत है या सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्राप्त कर रहा है। हालांकि, २.५० लाख रुपए तक आय वाले बाहरी एजेंसियों के कर्मचारी, स्वयंसेवी और ठेके पर काम करनेवाले कर्मचारी पात्र माने जाएंगे।
