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मीरा-भाईंदर मनपा कंगाल हो गई…पैसा नहीं मिला तो ठेकेदार ने खुद ही तोड़ डाले शौचालय!..छह महीने से भुगतान के लिए परेशान था कांट्रैक्टर

सुरेश गोलानी / मुंबई

महायुति सरकार ने जिस तरह से रेवड़ियां बांटकर सत्ता हासिल की है, उसके दुष्परिणाम दिखने लगे हैं। लोक लुभावन योजनाओं में पैसे खर्च करने के बाद सरकार का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है और इसका असर सरकार के हर विभाग में देखने को मिल रहा है। अनाप-शनाप खर्च सिर्फ राज्य सरकार नहीं कर रही है, बल्कि इस कार्य में राज्य की विभिन्न मनपाएं भी शामिल हैं। इनमें से एक है मीरा-भाईंदर मनपा। यह मनपा कंगाल हो गई है। इससे विकास कार्य तो ठप हो ही गया है, हालत यह है कि अब विकास बैकट्रैक पर जा रहा है। हाल ही में इसका नजारा तब देखने को मिला जब पैसा नहीं मिलने पर एक ठेकेदार ने अपने खुद के बनाए शौचालय तोड़ डाले।
मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार की गलत नीतियों का असर अब राज्य के मनपाओं के विकास कार्य पर पड़ने लगा है। निर्वाचित प्रतिनिधि न होने के कारण मनपा बेलगाम है और अधिकारी मनमाना खर्च कर रहे हैं। मनपा में भ्रष्टाचार का बोलबाला है, जिसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है।
कई ठेकेदारों के बिल हैं बकाया
जानकार बताते हैं कि मीरा-भाईंदर मनपा में कई ठेकेदारों के बिल बकाया हैं, पर इस तरह का मामला पहली बार देखने को मिला है। ये भुगतान कुछ महीनों से लेकर साल भर से ऊपर तक के रुके पड़े हैं। ऐसे ही एक ठेकेदार ने गत छह महीने से अपने बिलों का भुगतान न होने के कारण अपने ही किए हुए निर्माणकार्य को तोड़ दिया है।
शिमला गल्ली में गड़बड़
भाईंदर (पश्चिम) के गणेश आनंद नगर स्थित शिमला गल्ली में यह गड़बड़ी हुई। वहां ठेकेदार ने शौचालय बनाए थे। वहां मनपा द्वारा सार्वजनिक सुविधा के लिए निर्माणाधीन शौचालय का कुछ हिस्सा पेमेंट न मिलने पर गुस्साए ठेकेदार ने कल रविवार को खुद ही तोड़ डाला। ठेकेदार ने अपने बनाए १० शौचालयों को पूरी तरह से तोड़ दिया।
ठेकेदार के खिलाफ लोगों में आक्रोश!
मनपा द्वारा अपने बिलों का भुगतान न मिलने पर एक ठेकेदार ने गजब का काम किया। उसने खुद के बनाए शौचालय तोड़ डाले। यह मामला मीरा-भार्इंदर में देखने को मिला। ठेकेदार की इस हरकत पर लोगों में तीव्र आक्रोश देखने को मिला। लोगों ने ठेकेदार की इस हरकत का विरोध किया और शेष कुछ शौचालयों को बचा लिया।
इस मामले में पूर्व नगरसेवक पंकज पांडेय दरोगा ने इस घटना की तत्काल जांच करने के साथ, दोषी ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर उसे स्थाई रूप से ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा, ‘यह कार्य न केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाला है, बल्कि नागरिकों के मौलिक सुविधाओं के अधिकार का भी उल्लंघन है। शौचालय का निर्माण कार्य प्रगति पर था, किंतु यह अत्यंत खेदजनक है कि बिल का भुगतान न मिलने पर ठेकेदार ने बिना किसी पूर्व सूचना या आधिकारिक अनुमति के, बाहरी मजदूर लाकर लगभग १० शौचालयों को तोड़ दिया।’ सूत्रों के अनुसार, पिछले ६ महीनों में कर्मचारियों के वेतन तथा छोटे-मोटे खर्चों के अलावा लेखा विभाग ने आर्थिक तंगी के चलते ठेकेदारों के बिलों का भुगतान नहीं किया है।
सरकार के खोखले आश्वासन
विधानसभा चुनाव से पहले एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में चल रही ‘ईडी’ सरकार ने जनता से कई लोकलुभावन वादे किए और बड़ी-बड़ी परियोजनाओं का एलान कर मनपा को उन्हें पूरा करने के लिए करोड़ों रुपयों का फंड देने का आश्वासन दिया था। लेकिन ये वादे और आश्वासन खोखले साबित हो रहे हैं। इसका नकारात्मक असर मनपा द्वारा शुरू की गई कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर पड़ रहा है। कुछ योजनाएं निधि के अभाव में बिल्कुल ठप पड़ी हैं तो कुछ का निर्माणकार्य धीमी गति से चल रहा है।

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