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मुस्लिम वर्ल्ड : रूस की फैक्ट्री देख हिला अमेरिका!..एक बार में बनते हैं हजारों ईरानी `शाहेद’

सूफी खान

रूस और ईरान दो देश, दो ताकतें और अब एक साझा रणनीति। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक नया मोर्चा तैयार हो चुका है। यहां पश्चिमी दबावों को दरकिनार कर, ये दोनों राष्ट्र अपने-अपने हितों को साधने में जुट गए हैं और इस साझेदारी का सबसे बड़ा उदाहरण बना है रूस के येलाबुगा का ड्रोन सेंटर। मीडिया रिपोर्ट बताती है कि इस रूसी ड्रोन सेंटर से अब हर दिन सौ से अधिक ‘शाहेद-१३६’ ड्रोन तैयार हो रहे हैं।
ये वही शाहेद-ड्रोन हैं, जिनका पिछले महीनों में यूक्रेन के शहरों पर अंधाधुंध हमलों में इस्तेमाल हुआ। इतना ही नहीं, ईरान ने भी शाहेद-१३६ आत्मघाती ड्रोन से इजरायल में भयंकर तबाही मचाई। ईरान के शाहेद ड्रोन ने रूस को एक ऐसी बढ़त दी है, जिससे वॉशिंगटन और तेल अवीव में बेचैनी साफ देखी जा सकती है।
ईरान की मदद से बने इस रूसी कारखाने में जो ड्रोन तैयार हो रहे हैं, वो अब केवल यूक्रेन युद्ध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये अमेरिका और इजरायल की सैन्य रणनीति को खुला चैलेंज दे रहे हैं। मैटी ब्लैक रंग में रंगे ये ड्रोन, रात के अंधेरे में दुश्मन पर कहर बनकर टूटते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो रूस अब एक ही दिन में २,००० से ज्यादा ड्रोन हमले करने की क्षमता पा चुका है।
मिडिल ईस्ट में चर्चा है कि ईरान के लिए ये सिर्फ एक हथियार डील नहीं, ये उसका सामरिक संदेश है। एक तरफ ईरान अमेरिका के प्रतिबंधों को चुनौती दे रहा है तो दूसरी ओर इजरायल को चेतावनी दे रहा है कि अब अगर उस पर जंग थोपी गई तो ऐसा ही जवाब मिलेगा, जैसा पिछले दिनों मिला था-तकनीक से, रणनीति और साझेदारी से।
इस साझेदारी का राजनीतिक संदेश भी साफ है। अमेरिका के सामने ईरान और रूस एक ‘नया विश्व संतुलन’ खड़ा कर रहे हैं। जहां न तो वॉशिंगटन की पाबंदियां असरदार हैं, न ही इजरायली खुफिया एजेंसियों की चेतावनियां। एक्सपर्ट कहते हैं कि रूस को यूक्रेन युद्ध में जो सैन्य दबाव झेलना पड़ रहा था, अब ईरान उसकी पूर्ति कर रहा है। बदले में ईरान को मिल रहा है रूस का कूटनीतिक संरक्षण, अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर समर्थन और हथियारों की टेस्टिंग का बेखौफ मौका।

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