राजेश सरकार / प्रयागराज
श्रमिक बस्ती में रहने वालों को आवासीय मालिकाना अधिकार देने तथा बस्ती में वर्षों से अनाधिकृत रूप से काबिज पीएसी को हटाने का मामला सर्वोच्च न्यायालय ने संज्ञान में ले लिया है। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम कार्यवाही के लिए विचाराधीन है। श्रमिक बस्ती समिति के महासचिव विनय मिश्र ने उक्त जानकारी देते हुए बताया है कि बस्ती की समस्याओं के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को प्रार्थना पत्र भेजकर स्वत: संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई किए जाने का निवेदन किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समिति के महासचिव विनय मिश्र के पास भेजे गए संदेश में बताया गया है कि यह प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय में दर्ज हो गया है। कार्यवाही विचाराधीन है।
ज्ञातव्य है कि केंद्र सरकार द्वारा सन 1950 में अन्य राज्यों समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों में श्रमिक बस्तियों का निर्माण कराया गया था। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न कल- कारखानों में कार्य करने वाले मजदूर रहा करते हैं। 1978 में केंद्र सरकार ने आदेश जारी किया कि श्रमिक बस्तियों के आवासों में रहने वालों को उनका आवासीय मालिकाना अधिकार दे दिया जाए। दिल्ली, गुजरात, उड़ीसा, मध्य प्रदेश समेत अन्य कई राज्यों ने श्रमिक बस्तियों में रहने वाले लोगों को उनके आवासों का मालिकाना अधिकार दे दिया। लेकिन उत्तर प्रदेश में पिछले 43 वर्षों से यह समस्या लंबित है। इस समस्या को लेकर श्रमिक बस्ती समिति द्वारा लगातार कई वर्ष से शांति पूर्वक आंदोलन भी चलाया जा रहा है। विनय मिश्र ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के नियमों एवं शस्त्रागार के बारे में सेना के शस्त्रागार मानकों के विपरीत घनी नागरिक आबादी वाले क्षेत्र में अर्ध सैन्य बल के रहने से कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। नागरिक आबादी वाले क्षेत्र में इनके शस्त्रागार में गोला बारूद का भंडार होने के कारण कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। इस वजह से पीएसी को श्रमिक बस्ती से हटाकर कहीं सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया जाए। प्रार्थना पत्र में आग्रह किया गया है कि 42 वीं वाहिनी पीएसी के लोग श्रमिक बस्ती में इधर-उधर घूमते हैं। लोगों के घरों के सामने 42वीं वाहिनी पीएसी का कचरा फेंका जा रहा है। जिससे चारों ओर भयानक दुर्गंध फैल रही है। संक्रामक बीमारियों का खतरा है। बस्ती के राजकीय श्रम हितकारी केंद्र पर पीएसी के अवैध कब्जे से श्रमिकों में भारी रोष व्याप्त है। इसमें चलने वाले अस्पताल, पुस्तकालय, वाचनालय, व्यायामशाला आदि बंद हो जाने से श्रमिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों के जितने खेलने के पार्क थे। उन पर पीएसी द्वारा कब्जा कर लिए जाने के कारण लोग खुली हवा में सांस नहीं ले पा रहे हैं। मैदानों में लगे पुराने और विशाल फलदार वृक्षों को पाक प्रशासन ने बेरहमी से कटवा दिया है। लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। यहां तक की बच्चों के खेल के मैदान, नगर निगम प्राइमरी स्कूल का ग्राउंड, प्रमुख सड़कों पर भी इन लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। जिससे लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कत होती है। इन्हीं प्रमुख मुद्दों को लेकर प्रार्थना पत्र सर्वोच्च न्यायालय में भेजा गया था।
