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सावली बार में ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस का मामला…लाइसेंस लौटाने से नहीं बच सकते, दो इस्तीफा!.. गृह राज्यमंत्री पर अनिल परब का हमला

सामना संवाददाता / मुंबई

कांदिवली के ‘सावली बार’ में लेडीज डांस बार संचालन को लेकर मचे बवाल के बीच गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने कल बार का ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस लौटा दिया, लेकिन इससे विवाद थमने के बजाय और भड़क गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता एड. अनिल परब ने इसे ‘गुनाह कबूल करने जैसा’ करार देते हुए जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि सिर्फ लाइसेंस लौटाने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, बल्कि योगेश कदम को इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चोरी का माल वापस करने से चोर बेकसूर नहीं हो जाता है।
अपने निवास स्थान पर कल प्रेस कॉन्प्रâेंस आयोजित करते हुए एड.अनिल परब ने कहा कि योगेश कदम ने लाइसेंस वापस किया, इसका मतलब यह नहीं है कि वे इस मामले से बच निकले हैं। परब ने कहा कि कल जब हम पुलिस स्टेशन गए, उसके अगले ही दिन उन्होंने लाइसेंस वापस कर दिया। अगर कुछ भी अवैध नहीं किया गया तो फिर लाइसेंस लौटाने की जरूरत क्यों पड़ी? इसका मतलब उन्होंने खुद यह स्वीकार कर लिया कि सावली बार में गैरकानूनी गतिविधियां चल रही थीं। उन्होंने आगे कहा कि जांच पूरी होने से पहले ही चोरी का माल लौटाना आपको निर्दोष नहीं बनाता। गृह राज्यमंत्री पर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी होती है और वही अगर डांस बार जैसी महाराष्ट्र में प्रतिबंधित चीजें चलाते हैं तो यह शर्म की बात है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी डांस बार पर छापा पड़ता है, तो बार मालिक, मैनेजर और लाइसेंसधारी सभी पर कार्रवाई होती है तो फिर सावली बार मामले में ऐसा क्यों नहीं हुआ? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस पर राजनीतिक दबाव है और इसी वजह से कार्रवाई नहीं हो रही।
… तो लाचारी का जाएगा संदेश
एड. परब ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गृह राज्यमंत्री का इस्तीफा नहीं लेते, तो इससे यह संदेश जाएगा कि वे लाचार हैं। अगर मुख्यमंत्री लाचार होंगे तो महाराष्ट्र भी लाचार हो जाएगा। मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे योगेश कदम, माणिकराव कोकाटे, संजय शिरसाट, संजय राठौड़ जैसे कलंकित मंत्रियों का इस्तीफा तुरंत लें। माणिकराव कोकाटे के मंत्रालय बदलने पर परब ने कहा कि क्या मंत्रालय बदलना ही सजा है? क्या अब उनके जैसा आदर्श लेकर हम बच्चों को जुआरी बनाना चाहते हैं? ‘रमी’ खेलनेवाले तैयार करना चाहते हैं? कोकाटे पर जुआ खेलने की धाराएं लगाई जानी चाहिए थीं।
… शिवसेना के मामले में नहीं दिखाई तेजी
शिवसेना पक्षों और चिह्न से संबंधित केस को लेकर पूछे गए सवाल पर परब ने कहा कि तेलंगाना में दल-बदल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को ९० दिन में पैâसला सुनाने के आदेश दिए हैं, लेकिन शिवसेना के मामले में उतनी तेजी नहीं दिखाई जा रही। फिर भी हमें न्यायपालिका से न्याय की उम्मीद है।

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