राजन पारकर
महाराष्ट्र के लोकतंत्र के मुख्य मंदिर में हाल ही में ऐसा राजनीतिक रमी का खेल खेला गया कि न सिर्फ पत्ते खुले बल्कि मंत्रीपद के दांवपेच भी पूरी तरह बेनकाब हो गए। मानिकराव कोकाटे साहब ने विधानसभा नामक इस पवित्र सभागार में ऑनलाइन रमी का खेल जमा दिया और वही खेल आखिरकार उनके मंत्रालय से गच्छंती का कारण बन गया।
कृषि मंत्रालय की कुर्सी किसानों के आंसू पोंछने वाली, उनकी फसल को सुरक्षा देने वाली और उनकी मुश्किलें हल करने वाली मानी जाती है। लेकिन साहब की असली रुचि खेतों में नहीं, बल्कि रमी के टेबल पर थी! किसानों के लिए बीज बोने का समय आया तो साहब पत्तों का दांव बोने में मशगूल! नतीजा – मंत्रालय में खेतीबाड़ी का हिसाब गड़बड़ाया और रमी की बाज़ी हार गई। परिणामस्वरूप कृषि मंत्रालय गया और खेल मंत्रालय आ गया।
अब यह असल में राजनीतिक इनाम योजना है या पत्तों के खेल की प्रतियोगिता, यह कोई पूछने की जहमत नहीं उठा रहा। क्योंकि महाराष्ट्र की राजनीति का नया समीकरण यही है –
“खेलो रमी और जीतो मंत्रालय!”
अब आगे खेल मंत्री बनने के बाद कोकाटे साहब नया खेल प्रकार घोषित करेंगे, इसमें कोई शक नहीं –
ऑनलाइन रमी को आधिकारिक खेल का दर्जा देकर वे ‘रमी वर्ल्ड कप’ भारत में करवाएंगे, और खिलाड़ियों की सूची में पहला नाम होगा खुद साहब का! फिर इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, रजत पदक नहीं बल्कि मंत्रालय पदक जीतने के लिए नेता भिड़ते नजर आएंगे।
“अगर लोकतंत्र के मंदिर में पत्तों के खेल शुरू हो गए तो जनता की किस्मत का पत्ता किसी भी वक्त किनारे फेंका जाएगा, इसमें हैरानी कैसी?”
